उत्तराखंड : मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए बारिश के रेड अलर्ट के मद्देनजर राजधानी देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागाध्यक्षों, विभागीय नोडल अधिकारियों, क्यूआरटी और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी तंत्र को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग ने उत्तराखंड में आज भी भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही राजधानी देहरादून सहित हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिले के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक सोमवार 20 जुलाई को रेड अलर्ट और मंगलवार 21 जुलाई को बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस अवधि में कई स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश, जलभराव, भूस्खलन और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका व्यक्त की गई है। इस अलर्ट की वजह से जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहकर लगातार स्थिति पर नजर रखें।
जिलाधिकारी ने भूस्खलन और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनें, राहत एवं बचाव उपकरण, आवश्यक मानव संसाधन और अन्य संसाधनों की पूर्व से ही तैनाती के निर्देश दिए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में अनावश्यक देरी से बचते हुए तुरंत आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की आपदा या अप्रिय घटना की सूचना तत्काल जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र यानि डीईओसी को दी जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए हालात की लगातार निगरानी बनाए रखें ताकि जन-धन के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने आम जनमानस से भी मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रूप से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जोखिम वाले स्थानों पर जाने से परहेज करें और खराब मौसम के दौरान जिला प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए, जिससे किसी भी संभावित आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तत्काल एवं प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।
उधर, यमुना घाटी में लगातार हो रही बारिश से परेशानी उत्पन्न हो गई है। यमुनोत्री हाईवे पर कई जगह भूस्खलन के चलते सड़क पर पत्थर और मलबा आ रहा है, जिसके मार्ग अवरुद्ध हो गया है। स्यानाचट्टी और हनुमान चट्टी के बीच सड़क पर कटाव भी हो रहा है जिसकी वजह से स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रदेश में मौसम खराब होने से कई मार्ग बोल्डर व मलबा गिरने से बाधित हो रहे हैं और इनमें केदारनाथ पैदल मार्ग भी सम्मिलित है।फिलहाल पैदल यात्री संकरे मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं परंतु घोड़ा-खच्चर संचालन रुक गया है। चमोली में चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाले ज्योतिर्मठ – मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी मलबा गिरने से कुछ समय के लिए बाधित रहा।
गौरीकुंड – केदारनाथ पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। चीरबासा के समीप पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने की वजह से घोड़ा-खच्चर संचालन शुक्रवार सुबह से बंद कर दिया गया था। तीर्थयात्री जोखिम उठाकर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर संकरे मार्ग से आ – जा रहे हैं।
चमोली जिले में चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण ज्योतिर्मठ – मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार शाम पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने से कई घंटे तक यातायात में बाधा पड़ी रही। पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक दरककर हाईवे पर गिर गया था, जिससे दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। इसके अलावा भी राज्य के कई रास्ते मलबा गिरने से बाधित रहे। कई विभागों की टीम अवरुद्ध मार्गों को सुचारू करने में टीम जुटी हुई हैं।
