उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एलपीजी सिलिंडर की कमी से कामकाज प्रभावित होने लगा है, जिससे श्रमिकों का पलायन बढ़ गया है। लेबर चौक पर मजदूरों की संख्या घट रही है और बचे हुए मजदूरों को भी काम मिलने में परेशानी पेश आ रही है। इसके चलते स्थानीय निवासियों का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी अब श्रमिकों के पलायन के रूप में उभरकर सम्मुख आ रही है। ग्रेटर नोएडा के डेल्टा सेक्टर की रोटरी लगने वाले लेबर अड्डा पर श्रमिकों के जमा के जमावड़े में कमी आ गई है। साथ ही श्रमिकों पर काम नहीं मिलने का खतरा भी अब मडराने लगा है। सर्वाधिक पलायन उत्तराखंड की ओर देखने को मिल रहा है।

एक श्रमिक ने बताया कि उसके कई साथी जोकि उत्तराखंड और बिहार के रहने वाले हैं, वापिस चले गए हैं। जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, उनके वापिस यहां आने की उम्मीद न के बराबर है। लेबर अड्डा पर काम की तलाश में आने वाले श्रमिकों की संख्या में भी करीब एक तिहाई की कमी बताई जा रही है, जिसकी वजह काम मिलने में आ रही दिक्कत है। फैक्ट्रियों और संस्थानों में कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं ऐसे में वहां काम भी सीमित मात्रा में ही रह गया है।

बिहार से यहां काम करने आए श्रमिकों के अनुसार, कुछ बचत न हो तो इतनी दूर काम करने के लिए रहने का कोई फायदा नहीं है। जो सिलिंडर पहले 900 रुपए तक में उपलब्ध हो जाता था उसके लिए अब ब्लैक में 3000 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। उनके मुताबिक जब सिलिंडर पर ही इतने पैसे खर्च कर देंगे तो घर कैसे चला पाएंगे ? जब हालात सामान्य हो जाएंगे तभी वापस आ पाएंगे।

श्रमिकों के पलायन के चलते अब लेबर चौक पर पहले जैसी भीड़ नहीं दिखाई दे रही है। पहले जहां सुबह सवेरे बड़ी संख्या में मजदूर काम मिलने के इंतजार में खड़े रहते थे, वहीं अब सन्नाटा पसरा रहता है। इसका सीधा असर स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें अपने छोटे-मोटे कार्य करवाने के लिए भी मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं।

सिलिंडर महंगे दामों में मिल रहे हैं और इससे श्रमिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। महंगाई का सीधा प्रभाव उनकी बचत पर पड़ रहा है और महंगे सिलिंडर से बचत पूरी तरह समाप्त हो गई है। श्रमिकों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ रही है जिसका असर उनके पूरे परिवार पर  पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में उनके पास वापिस घर जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। 

वर्तमान समय में तीन से चार हजार रुपये में सिलिंडर मिल रहा है और श्रमिकों को चूल्हे और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उनका समय और मेहनत बढ़ रही है, बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *