उत्तराखंड : उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के समापन के उपरांत संसदीय कार्य मंत्री ने मीडिया से बातचीत की। वार्तालाप के दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही, विपक्ष के हंगामे, अनुपूरक बजट और पारित किए गए विधेयक संबंधित जानकारी साझा की।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आवश्यक वित्तीय और विधायी कामकाज पूर्ण करते हुए अनुपूरक बजट और राज्यहित से जुड़े 09 अन्य विधेयकों को सदन से पारित करा लिया गया। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हंगामे के चलते महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं की जा सकी।

संसदीय कार्य मंत्री के अनुसार, सदन में बजट और विधेयकों पर चर्चा के साथ विपक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना था, परंतु कार्यवाही अपेक्षित तरीके से अग्रसर नहीं हो पाई।

संसदीय कार्य मंत्री ने सत्र के पहले दिन की कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि सदन की कार्रवाई से पूर्व प्रदेश के दो वरिष्ठ नेताओं को श्रद्धांजलि दी गई। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय भुवन चंद्र खंडूड़ी तथा पूर्व मंत्री स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट के योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने उत्तराखंड के विकास और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। भुवन चंद्र खंडूड़ी मुख्यमंत्री के साथ केंद्र में परिवहन मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को वहन कर चुके थे, जबकि हीरा सिंह बिष्ट उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहने के साथ उत्तराखंड सरकार में भी मंत्री पद पर रहे।

सदन के सदस्यों ने दोनों नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया। इस प्रक्रिया में तकरीबन छह घंटे का समय लगा और इसके पश्चात सदन में निर्धारित विधायी कार्यवाही आगे बढ़ सकी।

संसदीय कार्य मंत्री ने अवगत कराया कि सत्र के दूसरे दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा और मतदान होना था। इसके साथ ही 09 अन्य विधेयकों पर भी सदन में चर्चा और उन्हें पारित करने का कार्यक्रम तय था। इस तरह अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक समेत कुल 10 विधेयक सदन की कार्यवाही में सम्मिलित थे।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने तमाम व्यवधानों के बावजूद अनुपूरक बजट और 09 अन्य विधेयकों को ध्वनिमत से पारित करा लिया। इन विधेयकों में वित्तीय प्रबंधन, जीएसटी और राज्य के अन्य दूसरे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े प्रस्ताव सम्मिलित थे।

विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष की भूमिका पर सवालिया निशान लगाते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने बजट और विधेयकों पर सार्थक चर्चा करने के स्थान पर हंगामे को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि सदन में प्रश्नकाल, नियम 58 के तहत सूचनाओं और नियम 310 के तहत उठाए जाने वाले विषयों पर भी चर्चा की जानी थी। परंतु कार्यवाही में व्यवधान आने के चलते कई मुद्दों पर चर्चा का अवसर नहीं मिल सका।

मंत्री के अनुसार, यदि सदन सामान्य तरीके से चल पाता तो विधायक अपनी बात रखते, सरकार जवाब देती और अलग-अलग विषयों पर उपयोगी सुझाव भी सामने आते। उन्होंने कहा कि विधानसभा में चर्चा करने का लक्ष्य मात्र विधेयकों को पारित कराना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच संवाद कायम करना भी है। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को उसकी नाकामी करार दिया।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *