उत्तराखंड : उत्तराखंड राज्य में स्थित पंचकेदार के तीन प्रमुख धामों तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ, द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर और भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने की तिथियों की घोषणा विजय दशमी पर्व के पावन अवसर पर घोषित कर दी गई हैं।
शीतकाल के आगमन के साथ ही हिमालय की ऊंची चोटियों पर स्थित इन धामों में नियमित दर्शन बंद हो जाएंगे और भगवान की चल विग्रह उत्सव डोलियां अपने-अपने शीतकालीन गद्दी स्थलों के लिए प्रस्थान कर जाएंगी।
समूचे विश्व में प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर की प्रातः 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके पश्चात बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंच जाएगी।
विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट भी आने वाली 11 नवंबर को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। विजय दशमी के शुभ अवसर पर यमुनोत्री धाम में मंदिर समिति और पुरोहित समाज की उपस्थिति में बैठक आयोजित करके कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निकाला गया।
तय कार्यक्रम के मुताबिक, बुधवार की प्रातः 10 बजकर 28 मिनट पर अनुराधा नक्षत्र और सौम्य धनु लग्न में विधि-विधान पूर्वक मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री धाम में होने वाली नियमित पूजा-अर्चना का समापन भी हो जाएगा।
हिमालय पर्वत पर सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट आने वाले 06 नवंबर को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। पंचांग गणना के मुताबिक, विजयदशमी के अवसर पर शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कू मठ में कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा की गई।
इसके उपरांत 08 नवंबर को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली मक्कू मठ पहुंचेगी, जहां शीतकाल में श्रद्धालु भगवान के दर्शन किए जा सकेंगे।
द्वितीय केदार भगवान मद महेश्वर धाम के कपाट आगामी 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके पश्चात तय कार्यक्रम के अनुरूप भगवान की उत्सव डोली गौंडार में रात्रि विश्राम करेगी। 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी, 18 नवंबर को रांसी से गिरिया और 19 नवंबर को गिरिया से ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंच जाएगी। यहां भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा संपन्न की जाएगी।
तीनों धामों की कपाट बंद होने की तिथियों की घोषणा के साथ ही शीतकालीन पूजा की तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं। अब शीतकाल के दौरान श्रद्धालु ऊखीमठ और मक्कू मठ स्थित गद्दी स्थलों में भगवान के दर्शन करेंगे।
वहीं, यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजयदशमी के पर्व पर परंपरा के अनुरूप मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में कपाट बंद करने की तिथि और शुभ मुहूर्त का निर्धारण किया गया।
भाई दूज के दिन निर्धारित मुहूर्त में मां यमुना के मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके पश्चात शीतकाल में मां यमुना की पूजा-अर्चना परंपरानुसार उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में की जाएगी। अब शीतकाल के दौरान श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन और पूजा-अर्चना वहीं कर सकेंगे।
चारधाम यात्रा के समापन की ओर बढ़ने के साथ ही अब श्रद्धालुओं की नजरें कपाट बंद होने के धार्मिक आयोजनों पर केंद्रित हैं। यमुनोत्री धाम में कपाट बंद होने के पश्चात श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन के लिए खरसाली पहुंचेंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा परंपरानुसार निर्धारित शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर पर संपन्न की जाएगी।