पंजाब, संवाददाता : अनिल सौदा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के तहत सड़कों, गलियों और मोहल्लों में घूम रहे आवारा गोवंश की सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पंजाब गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष कीमती भगत ने मंगलवार को मलेरकोटला के डिप्टी कमिश्नर परिसर में प्रशासनिक अधिकारियों, गौशाला प्रबंधकों तथा गौ सेवा से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष बैठक की।
बैठक को संबोधित करते हुए कीमती भगत ने कहा कि पंजाब सरकार की पहली प्राथमिकता आवारा गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर उनकी बेहतर देखभाल करना है। ऐसा करने से जहां एक ओर गोवंश की जान बचाई जा सकती है और वहीं दूसरी ओर सड़क हादसों में भी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के कारण प्रत्येक वर्ष अनेक गंभीर मार्ग दुर्घटनाएं सामने आती हैं। साथ ही इनसे किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गौशालाओं को प्रत्येक गौ के पालन-पोषण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि वे बेहतर तरीके से गोवंश की देखभाल कर सकें। उन्होंने गौशाला संचालकों से सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा आवारा गोवंश को गौशालाओं तक पहुंचाने में प्रशासन का सहयोग करने की भी अपील की।
कीमती भगत ने कहा कि पंजाब में वर्तमान समय में लगभग 523 गौशालाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर आवारा गोवंश सड़कों पर दिखाई देते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार विशेष योजना के तहत जिला प्रशासन, नगर परिषदों और गौशालाओं के आपसी समन्वय से अभियान चला रही है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में मलेरकोटला के एसएसपी गुरमीत सिंह के साथ भी विस्तृत चर्चा की गई है। यदि जिले में गौ तस्करी, गौमांस की अवैध तस्करी अथवा इससे जुड़ी कोई भी गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उपाध्यक्ष ने कहा कि पंजाब गुरुओं और पीरों की पवित्र धरती है तथा यहां गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन से आवारा गोवंश की देखभाल के लिए चलाए जा रहे अभियान को और प्रभावी बनाने तथा आम लोगों को भी इसमें सहयोग के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, गौ सेवा दल के सदस्यों, गौशाला प्रबंधकों तथा अन्य संबंधित प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए और आवारा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मिलकर कार्य करने का भरोसा दिया।
