कर्नाटक : यदि कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु एरिया पार्किंग रूल्स, 2026 लागू हो जाते हैं, तो बेंगलुरु की सड़कों पर गाड़ियां पार्क करना काफी महंगा हो सकता है। इन नियमों के तहत सालाना रेजिडेंशियल परमिट के लिए 25000 रुपए तक का शुल्क और ऑन-स्ट्रीट पार्किंग के लिए प्रति घंटे की दर से शुल्क लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
ड्राफ्ट नियमों का उद्देश्य सार्वजनिक सड़कों पर लंबे समय तक गाड़ी खड़ी करने को हतोत्साहित करना है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे सड़को पर ट्रैफिक जाम और पार्किंग की जगह की कमी की समस्या को हल किया जा सकता है। सरकार ने नोटिफिकेशन जारी होने के 30 दिनों के अंदर जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।
नियम 13 के तहत पब्लिक पार्किंग अब मुफ़्त नहीं रहेगी, सिवाय उन साइकिल और ऑटो-रिक्शा के जो तय स्टैंड पर पार्क किए जाएंगे। सड़कों को कमर्शियल एक्टिविटी के आधार पर ए, बी और सी कैटेगरी में विभाजित किया जाएगा। सड़क पर कार पार्किंग के लिए कैटेगरी ए की सड़कों पर 80 रुपए प्रति घंटा, कैटेगरी बी की सड़कों पर 60 रुपए और कैटेगरी सी की सड़कों पर 40 रुपए का रेट निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
दोपहिया वाहनों के लिए यह चार्ज क्रमशः 40 रुपए 30 और 20 रुपए निर्धारित किया गया है। दो घंटे से ज़्यादा पार्किंग के लिए चार्ज बढ़ाए जा सकते हैं और पीक-आवर के रेट डेढ़ गुना तक बढ़ाए जा सकते हैं।
सड़क से हटकर यानि ऑफ-स्ट्रीट होने वाली मासिक पार्किंग के रेट सड़क की कैटेगरी के आधार पर टू-व्हीलर के लिए 1000 रुपए से 2,000 रुपए और कारों के लिए 2,000 रुपए से 4,000 रुपए के मध्य निर्धारित होंगे। रात्रि 8 बजे से सुबह 8 बजे के बीच मंथली ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग के लिए 50 फीसदी छूट का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इन नियमों का रिहायशी इलाकों पर भी बड़ा असर देखने को मिलेगा। बिल्डिंग के नियमों के अनुसार गाड़ियों को प्राइवेट कंपाउंड या गैराज में ही पार्क करना आवश्यक है। जिन लोगों के पास ऐसा स्थान नहीं है और वे पब्लिक रोड पर कार पार्क करते हैं, उन्हें रिहायशी पार्किंग परमिट की जरूरत होगी। इसके लिए एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज के अलावा छोटी कारों के लिए सालाना 15000 रुपए सेडान के लिए 20000 और एसयूवी के लिए 25000 रुपए अदा करने होंगे।
परमिट सिर्फ वहीं के लिए जारी किए जाएंगे सड़क की चौड़ाई काफ़ी हो। पार्किंग के बाद ट्रैफिक के लिए 04 से 06 मीटर की सड़क खाली रहनी चाहिए और साथ ही दोनों ओर 1.8 मीटर का फ़ुटपाथ भी होना जरूरी है। मंज़ूरी देने से पहले जीबीए मार्शल द्वारा उस स्थान का मुआयना किया जाएगा
ड्राफ़्ट में मेट्रो और सब अर्बन रेलवे स्टेशनों के 150 मीटर के दायरे में नो-पार्किंग ज़ोन बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसे बाद में आवश्यकतानुसार 500 मीटर तक बढ़ाया जा सकता है। बड़े सिग्नल वाले जंक्शन के 100 मीटर के दायरे में, बस स्टॉप के 25 मीटर के दायरे में और फ़ुटपाथ पर पार्किंग की मनाही रहेगी।
सड़क के किनारे गैर-कानूनी पार्किंग करने पर कारों के लिए 500 रुपए और दो-पहिया वाहनों के लिए 300 रुपए का जुर्माना तय किया जा सकता है। फुटपाथ पर पार्किंग करने पर क्रमशः 1000 और 600 रुपए का जुर्माना लग सकता है। प्राइवेट पार्किंग ऑपरेटरों को नो-पार्किंग ज़ोन से गाड़ियां क्लैंप करने या टो करने का अधिकार भी प्रदान किया जा सकता है, लेकिन टो करने से पहले या उसके दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग आवश्यक होगी।
जो कमर्शियल संस्थान मंज़ूरी वाली बेसमेंट पार्किंग को दुकानों या गोदामों में बदल देते हैं और ग्राहकों को सड़क पर गाड़ी पार्क करने के लिए मजबूर करते हैं, उन पर भी 5000 रुपए का साप्ताहिक जुर्माना लगाया जा सकता है। एक माह के भीतर पार्किंग की सुविधा बहाल न करने पर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और ट्रेड लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है।
इस ड्राफ्ट में प्राइवेट पार्किंग सुविधाएं तैयार करने के लिए प्रोत्साहन भी दिए गए हैं। खाली जगहों पर कम से कम 15 कारों के लिए सर्फेस पार्किंग की सुविधा देने पर प्रॉपर्टी टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जा सकती है, जबकि 30 से 200 कारों की क्षमता वाली मल्टी-लेवल या मशीनीकृत सुविधाओं के लिए प्रॉपर्टी टैक्स और सर्विस चार्ज में 100 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जा सकती है। जमीन के मालिक ऐसी सुविधाओं को स्वयं भी चला सकते हैं या जमीन को तीन से 15 साल के लिए सिविक अथॉरिटी को लीज पर भी दे सकते हैं।
सरकार का मकसद बेंगलुरु की पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करना और भीड़-भाड़ कम करना है, परंतु यदि यह नियम लागू हो जाते हैं, तो प्रस्तावित शुल्क, खासकर रेजिडेंशियल परमिट फीस, वाहन मालिकों के आर्थिक बोझ में इजाफा कर सकते हैं।