आंध्र प्रदेश : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इच्छा व्यक्त की है कि भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक अंतर के बावजूद ब्रिक्स देशों को खेलों के जरिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने इन देशों के बीच खेल साझेदारी को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए विशाखापत्तनम में मुख्यालय वाला एक यूथ एंड स्पोर्ट्स इनोवेशन नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि खेल सिर्फ प्रतियोगिताएं नहीं होतीं, बल्कि यह लोगों की संस्कृति, परंपराओं और जीवन शैली का प्रतीक भी हैं। शनिवार को विशाखापत्तनम में आयोजित हुई ब्रिक्स युवा और खेल मंत्रियों की बैठक के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और एक आधिकारिक भोज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हिस्सा लिया और अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि खेलों के माध्यम से कोच, ट्रेनर, एथलीटों, फिजियोथेरेपिस्ट, इवेंट मैनेजर और उद्यमियों को कई नए अवसर मिलते हैं। स्पोर्ट्स टूरिज्म से होने वाले निवेश के साथ-साथ, इंटरनेशनल इवेंट्स से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलता है। खेलों से न सिर्फ लोग सेहतमंद बनते हैं, बल्कि वह इसके जरिए मजबूत अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।
ओलंपिक्स-2036 प्रोजेक्ट के तहत, हम ग्रामीण स्तर से लेकर इंटरनेशनल स्तर तक टैलेंट की पहचान बनाने और उसे बढ़ावा देने के लिए एक सिस्टम विकसित कर रहे हैं। हम साइंटिफिक ट्रेनिंग के जरिए टैलेंटेड लोगों को 2036 ओलंपिक्स और दूसरे अन्य इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन के लिए तैयार करेंगे। इसके लिए हम 56 स्पोर्ट्स स्कूलों को राज्य-स्तरीय अकादमियों और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस से जोड़ेंगे।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि अमरावती को केंद्र मानकर एक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा और इसे एक स्पोर्ट्स सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नेल्लोर को स्पोर्ट्स इक्विपमेंट और अपैरल टेक्नोलॉजी बनाने के केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हमने विशाखापत्तनम को इंटरनेशनल वॉटर स्पोर्ट्स सेंटर के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हम राज्य में ट्रेनिंग, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम के तहत एक व्यापक पॉलिसी बना रहे हैं। आंध्र प्रदेश ब्रिक्स देशों के साथ वर्ल्ड-क्लास स्किल्स साझा करने के लिए तैयार है।
इसके तहत सहयोग और ट्रेनिंग का आदान-प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि हमें स्पोर्ट्स इक्विपमेंट बनाने, हाई लेवल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने, इंटरनेशनल इवेंट्स आयोजित करने, वॉटर स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स टूरिज्म के क्षेत्र में साझेदारी निभाने के लिए पहल करनी चाहिए।
इससे पहले ब्रिक्स देशों के खेल मंत्रियों के साथ एक खास बैठक आयोजित की गई थी जिसमें केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया को एक मेमोरेंडम सौंपा गया। इस बैठक में रक्षा राज्य मंत्री निखिल खडसे, राज्य मंत्री डोला श्री बाला वीरंजनेयस्वामी, कोंडापल्ली श्रीनिवास, वंगलपुडी अनीता, रामप्रसाद रेड्डी सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित हुए।
इस बैठक में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि युवाओं की भागीदारी से ही बेहतर भविष्य की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिक्स देशों की संयुक्त गतिविधियों में युवाओं को उचित प्राथमिकता दी जानी चाहिए और इस गठबंधन को और अधिक मजबूती प्रदान की जानी चाहिए।
ब्रिक्स बैठकों में भारत की अध्यक्षता के बारे में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल लाभार्थी के तौर पर नहीं, बल्कि एक साझा भविष्य को आकार देने में सक्रिय भागीदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का यही नजरिया है।
विदित हो कि शनिवार को विशाखापत्तनम में ब्रिक्स देशों के युवा मामलों के मंत्रियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ने चीन, रूस, ब्राजील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई जैसे सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की।
इस मौके पर युवा विकास और सशक्तिकरण सहयोग को और मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के लिए युवा सम्मेलन और युवा परिषद की बैठकें आयोजित हुईं। मंत्री मांडविया ने युवाओं से भविष्य के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए बताया कि हमने देश की आज़ादी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर, यानी 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम देश का नेतृत्व करने के लिए बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड वाले एक लाख युवा लीडर तैयार करेंगे। इस मौके पर ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने एक पौधा मां के नाम कार्यक्रम के तहत विशाखापत्तनम में बौद्ध ऐतिहासिक धरोहर स्थल थोटलाकोंडा में पौधे भी रोपे।