नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में सरकार ने भले ही गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए पूरी दिल्ली में विजिलेंस की टीम तैनात की हुई हो, लेकिन सरकार की ढीली जांच व्यवस्था की वजह से कई जगह खुलेआम सिलिंडरों की कालाबाजारी की जा रही है।
सरकार के तमाम दावों के बावजूद दिल्ली में सिलिंडर की कालाबाजारी थम नहीं रही है। लोगों के अनुसार, अव्वल तो एलपीजी सिलिंडर की डिलिवरी की ही नहीं जा रही है और अगर हो भी रही है तो डिलीवरी कर्मचारी 500 से 700 रुपए अतिरिक्त मांग रहे हैं। साथ ही जो सिलिंडर आ रहा उसमें 5 – 6 किलो तक गैस कम आ रही। इस कारणवश लोग कतार में खड़े होने के लिए विवश हो रहे हैं।
एलपीजी संकट का असर अब आम आदमियों और मजदूरों की जिंदगी तथा रोजगार पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। राजधानी की विभिन्न लेबर मंडियों में गैस संकट के चलते मजदूरों की संख्या में कमी देखी जा सकती है। सुबह-सुबह काम की तलाश में जुटने वाले मजदूरों की भीड़ अब पहले की अपेक्षा कम होती जा रही है। बताया जा रहा है कि एलपीजी संकट के चलते मजदूर पलायन कर रहे हैं और जो मजदूर बचे हैं, वो भी पलायन की तैयारी को तत्पर हैं।
ठेकेदारों ने भी मजदूरों के पलायन की पुष्टि की है। ठेकेदारों व स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां सुबह बड़ी संख्या में मजदूर मिल जाया करते थे, अब मजदूर नहीं मिल रहे। इलाके की लेबर मंडियों में पहले की तुलना में बहुत कम भीड़ नजर आ रही है।
साथ ही दिल्ली सरकार के निर्देशों के बावजूद 5 किलो वाले छोटे गैस सिलिंडर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बड़े सिलिंडरों के साथ साथ छोटे सिलिंडरों की कमी भी अब लोगों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। राजधानी में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से आम जनमानस परेशानी का सामना कर रहे हैं। खासतौर पर कम खपत वाले परिवारों और छोटे कारोबारियों को ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कई एजेंसियों पर छोटे सिलिंडर या तो उपलब्ध ही नहीं हैं या फिर बेहद सीमित संख्या में मिल पा रहे हैं, जो लोगों की भीड़ के चलते जल्दी ही खत्म हो जाते हैं। ठेला चालकों, छोटे दुकानदारों और किराए पर रहने वाले लोगों के लिए यह समस्या ज्यादा गंभीर बन रही है। ऐसे लोग बड़े सिलिंडर का खर्च वहन नहीं कर सकते तो मजबूरी में उन्हें दूसरे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं।
गैस एजेंसियों के दावों और हकीकत में अंतर नजर आ रहा है। जंगपुरा, आरके पुरम और गोल मार्केट स्थित गैस एजेंसियों की मानें तो गैस सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और जो लोग सिलिंडर लेने आ रहे हैं उन्हें दे दिया जा रहा है। ज्यादातर गैस एजेंसियों के संचालकों का कहना है कि राजधानी में सिलिंडर की किसी तरह की कोई कमी नहीं है, सिर्फ ऐसी अफवाह फैलाई जा रही है।
गैस एजेंसी संचालक बता रहे हैं कि ज्यादातर उपभोक्ताओं को समय पर सिलिंडर दिया जा रहा है। कुछ मामलों में ट्रांसपोर्ट या तकनीकी कारणों से देरी हो सकती है, लेकिन इसको कोई बड़ी या गंभीर समस्या नहीं माना जाना चाहिए। सप्लाई सामान्य है और अनावश्यक रूप से इसे गंभीर मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं, जमीनी हकीकत इससे काफी इतर है। राजधानी नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष के अनुसार, अभी तक गैस एजेंसियों पर छोटे सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। छोटी सिलिंडरों की कमी के चलते आम गैस उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गैस की कमी के साथ साथ बढ़ती कीमतों ने भी गरीब परिवारों की परेशानियों में इजाफा कर दिया है। मजदूरों का कहना है कि पहले जितने रुपए खर्चकर कई दिनों तक गैस चल जाती थी, अब उतने में कुछ दिन ही काम चल पा रहा है। आर्थिक तंगी की वजह से कई परिवारों ने गैस का उपयोग कम कर दिया है। कुछ घरों में दिन में सिर्फ एक ही बार खाना बन पा रहा है, जबकि कई लोग अब लकड़ी और कोयले का सहारा लेने को विवश हैं।
ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित झुग्गियों में रहने वाले लोगों ने बताया कि उनकी समस्याएं अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं। उनके लिए गैस की यह कमी सिर्फ असुविधा ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भी गंभीर संकट बन चुकी है, क्योंकि उनके पास इसपर निर्भरता के अलावा कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है।
