नई दिल्ली : दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030 का ड्राफ्ट जारी किया गया है और उस पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए हैं।

दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए ईवी नीति 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। परिवहन विभाग की ओर से जारी इस ड्राफ्ट को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया है ताकि आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें। जनता अगले 30 दिनों के भीतर ईमेल या पोस्ट के द्वारा अपने सुझाव भेज सकते हैं, जिसके पश्चात अंतिम नीति तैयार की जाएगी।

सरकार ने नई नीति को ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए जनता की भागीदारी को अहम समझा है। दिल्ली के आम लोग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञ इस पर अपने सुझाव और आपत्तियां दे सकते हैं। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि इस ड्राफ्ट पर अभिमत और सुझाव नोटिस जारी होने की तिथि से 30 दिनों के अंदर, 10 मई 2026 तक भेजे जा सकते हैं।

यह पॉलिसी भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो स्वच्छ वायु और प्रदूषण मुक्त वातावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानती है। इस नीति के मुख्य उद्देश्य सभी वाहन वर्गों में ईवी अपनाने को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर लोगों की निर्भरता कम करना है।

दिल्ली सरकार की प्रस्तावित इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 में पुराने वाहनों को हटाने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए स्क्रैपिंग प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मसौदे के मुताबिक, जो वाहन मालिक अपने पुराने वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा करा देंगे उन्हें नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।

इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर 10,000 रुपये, तीन पहिया पर 25,000 रुपये, गैर-परिवहन श्रेणी की इलेक्ट्रिक कार पर एक लाख रुपये और चार पहिया मालवाहक इलेक्ट्रिक वाहन पर 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रस्तावित है। इस योजना का लाभ लेने के लिए यह अनिवार्य होगा कि पुराना वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग के जरिए हटा दिया गया हो तथा उसका प्रमाणपत्र जारी किया जा चुका हो।

इसके साथ ही, स्क्रैपिंग प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना अनिवार्य होगा, तभी यह प्रोत्साहन लागू हो सकेगा। माना जा रहा है कि इस प्रावधान से न सिर्फ सड़कों पर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या घटेगी, बल्कि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित होने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा।

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