नई दिल्ली : पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब कपड़ा और प्लास्टिक उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुई अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते कच्चे माल की कीमतों में उछाल आया है। इस बढ़ोतरी का असर कपड़ा और प्लास्टिक उद्योग पर भी देखा जा रहा है। राजधानी दिल्ली के प्रमुख कपड़ा बाजार चांदनी चौक, गांधी नगर, टैंक रोड़, लाजपत नगर, करोल बाग और सरोजिनी नगर मार्केट में कारोबार सुस्त पड़ता दिखाई देने लगा है।
गांधी नगर के थोक कपड़ा व्यापारी बता रहे हैं कि पहले जो कच्चा माल सस्ते में मिल जाता था, अब उसकी कीमत काफी बढ़ गई है। इसका सीधा असर तैयार कपड़ों पर पड़ा है और ग्राहक अब सीमित मात्रा में ही खरीदारी करने आ रहे हैं। चांदनी चौक के दुकानदार के अनुसार, इस समय मुनाफा लगभग समाप्त सा हो गया है। ग्राहक सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं या खरीदारी टाल रहे हैं जिससे बिक्री में लगातार गिरावट आ रही है।
व्यापारियों के मुताबिक, धागे, सूती और सिंथेटिक फाइबर की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और ग्राहकों की जेब पर भी भार बढ़ गया है।
सरोजिनी नगर मिनी मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता का असर थोक बाजारों के साथ-साथ स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है। जब कच्चे माल की कीमतों में इजाफा होता है, तो उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में छोटे दुकानदार सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि कपड़े के दाम में में बढ़ोतरी का असर व्यापारियों के साथ-साथ आम आदमी की जेब पर भी पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि का असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ रहा है। पॉलीमर और रेजिन जैसे कच्चे माल महंगे हो गए हैं। राजधानी के प्रमुख प्लास्टिक बाजार सदर बाजार ,ओखला इंडस्ट्रियल एरिया और बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में इसका असर स्पष्ट तौर पर दिखाई देने लगा है।
बाजारों के मामलों के आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कच्चे माल की कमी और आयात में देरी की वजह से कीमतों में तेजी आई है। इसका प्रभाव अब सीधे तौर पर स्थानीय बाजारों पर पड़ रहा है। ग्राहक अब सिर्फ जरूरी सामान की खरीदारी ही कर रहे हैं।
महंगाई का असर आम जनमानस पर भी स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है। पहले लोग त्योहारों या जरूरत के समय आसानी से नए खरीद लेते थे, लेकिन अब कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि लोगों को सोच – समझकर ही खरीदारी करनी पड़ रही है। वर्तमान समय में हर चीज महंगी हो गई है।
