उत्तराखंड : आखिरकार लंबे इंतजार के उपरांत दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मंगलवार को उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में प्रवेश कर लिया। मौसम विभाग ने बुधवार से अगले चार दिनों तक प्रदेश के कुछ इलाकों में बेहद भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है। मानसून की उत्तरी सीमा उत्तराखंड के कई हिस्सों से गुजर रही है और इसके अगले दो – तीन दिनों में बचे हुए क्षेत्रों में भी पूरी तरह से सक्रिय हो जाने की प्रबल संभावना बन गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक वर्तमान मौसम प्रणाली के तहत पंजाब से लेकर उत्तर बंगाल की खाड़ी तक मौसमी द्रोणिका सक्रिय है, जिससे प्रदेश में पर्याप्त नमी पहुंचने की संभावना बनी है। इसके साथ ही दो जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी अपना असर दिखाएगा, जिससे बारिश में और तेजी आ जाएगी।

मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार 01 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर जनपद के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही नैनीताल, टिहरी, पौड़ी, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में भी भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

02 जुलाई को भी राजधानी देहरादून सहित पौड़ी, टिहरी, नैनीताल और बागेश्वर में भारी से बेहद भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है। तीन और चार जुलाई को भी कई पर्वतीय जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज बारिश पड़ने का अनुमान है। इस दौरान तेज रफ्तार से हवाएं चलने की भी संभावना बन रही है।

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि निरंतर बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मलबा आने की घटनाएं घट सकती हैं। नदियों और गदेरों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा भी बना रहेगा। कई स्थानों पर सड़कें और राजमार्ग बाधित हो सकते हैं, जिससे आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।

ऐसे मौसम में प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से अनावश्यक यात्रा से बचने और सतर्क रहने की अपील की है। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। भारी बारिश के दौरान नदी-नालों से दूर रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करने की चेतावनी दी गई है।

मौसम विज्ञान विभाग देहरादून से जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक राज्य में अगले कुछ दिन कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जताई की गई है। इसके मद्देनजर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को एहतियाती एवं आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी की जाए और राहत एवं बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा जाए। मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में संबंधित विभाग तत्काल मार्ग खोलने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। सभी विभागीय अधिकारी, आपदा प्रबंधन से जुड़े नोडल अधिकारी एवं आईआरएस प्रणाली के अधिकारी सक्रिय रहें तथा अपने मोबाइल एवं संचार माध्यम लगातार चालू स्थिति में रखें।

इसके अतिरिक्त पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों पर मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक प्रतिबंध लगाने, विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश जारी किया गया है। सचिव आपदा प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि मौसम विभाग व प्रशासन की जारी एडवाइजरी का पालन करें, अनावश्यक यात्रा करने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन अथवा आपदा नियंत्रण कक्ष से तत्काल संपर्क स्थापित करें।

उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी दक्षिण-पश्चिम मानसून ने करीब पांच दिन की देरी से दस्तक दे दी है। राज्य के सात जिलों के अधिकांश हिस्सों में मानसून पहुंच गया है। मौसम विभाग ने 02 से 04 जुलाई तक कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने झमाझम बारिश के साथ हिमाचल प्रदेश में दस्तक दी। मंगलवार को एंट्री के साथ ही प्रदेश के सात जिलों को मानसून ने भिगो दिया है। सामान्य यानि 25 जून के मुकाबले इस बार मानसून करीब 5 दिन की देरी से प्रदेश में पहुंचा है। मानसून के दस्तक देते ही कई क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई है और मौसम विभाग ने बुधवार से प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

मानसून के दस्तक देते ही प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। मंगलवार को कांगड़ा और मंडी में दिनभर जमकर मेघ बरसे, जबकि राजधानी शिमला में शाम के वक्त तेज बारिश हुई। विदित हो कि प्रदेश में पिछले वर्ष मानसून 20 जून को पहुंचा था, लेकिन इस बार करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक मानसून ने राजधानी शिमला के अलावा कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी, सिरमौर और कांगड़ा के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लिया है। आने वाले दो से तीन दिन में ऊना, चंबा, बिलासपुर, हमीरपुर और सोलन सहित शेष जिलों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 

मानसून की सक्रिय शुरुआत को देखते हुए अगले चार दिन के लिए राज्य में मौसम का येलो एवं ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। एक से चार जुलाई के बीच निचले एवं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक बारिश होने की संभावना बन रही है।

हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग की ओर से 2 और 3 जुलाई के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट के बीच मौसम का मिजाज बदला नजर आ रहा है। बुधवार को घने बादल छाए रहे जिससे बारिश की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, फिलहाल ब्यास नदी सामान्य जलस्तर पर बह रही है और अभी तक नदी में बाढ़ जैसी स्थिति या जलस्तर में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है।

प्रशासन निरंतर मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए अलर्ट को देखते हुए लोगों से नदी-नालों के समीप जाने से बचने और खराब मौसम के दौरान सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

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