हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लगातार दो दिन तक हुई भारी बारिश की वजह से कई जगह पर नुकसान हुआ है।  संजौली कॉलेज के नजदीक बोथवेल क्षेत्र में एक बार फिर भारी भूस्खलन हुआ। शनिवार तड़के हुए इस भूस्खलन से इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। भूस्खलन के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन कई मकानों पर खतरा मंडराने लगा है।

भूस्खलन संजौली कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग के समीप हुआ, जहां सड़क के नीचे की ढांग ढहकर नीचे बने रिहायशी मकानों की ओर आ गई। संजौली कॉलेज के नजदीक बोथवेल में भारी भूस्खलन से कई मकान खतरे  की जद में आ गए हैं। वहीं रझाणा में भूस्खलन की चपेट में आकर दो गाड़ियां मलबे में दब गईं और मिनी कुफ्टाधार में रास्ता ढह गया है। शांकली में भी एक भवन का कुछ हिस्सा ढह गया है।

इससे मकानों तक जाने वाला रास्ता भी बीच में से दरक गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक तीन – चार भवन खतरे की जद में हैं और किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है। घटना के बाद स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और बारिश के बीच खुले में खड़े होकर मदद का इंतजार करते रहे। लोगों का कहना है कि निरंतर फोन करने के पश्चात कुछ पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और एहतियात के तौर पर मकान खाली करने की सलाह दी। लेकिन प्रभावित परिवारों के अनुसार उनके पास जाने और रहने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वह सुबह से ही पार्षद, विधायक और मेयर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को निरंतर फोन कर रहे हैं, लेकिन न तो उनका फोन उठाया जा रहा है और न ही कोई उनकी मदद के लिए मौके पर पहुंच रहा है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द राहत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में एक निजी निर्माण कार्य के लिए नगर निगम से अनुमति दी गई थी, जिसके बाद पहाड़ी की खुदाई की गई। लगातार हो रही बारिश के कारण खुदाई वाली जगह कमजोर हो गई और इसी वजह से भूस्खलन की घटना हुई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और समूचे क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक निरीक्षण कराया जाए।

विदित हो कि इसी स्थान पर पिछले वर्ष जून 2025 को भी भारी भूस्खलन हुआ था। उस समय पहाड़ी से मलबा और चट्टानें सीधे रिहायशी मकानों में जा घुसी थीं, जिसके चलते कई बच्चे और महिलाएं अपने घरों में फंस गए थे। एक बार फिर उसी क्षेत्र में भूस्खलन होने से स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

प्रदेश में मानसून के कहर से विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश-भूस्खलन और बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो गई है। भारी बारिश-भूस्खलन की वजह से पिछले 24 घंटों के दौरान कई व्यक्ति घायल हो गए। प्रदेश में नदी-नाले उफान पर हैं छोटी-बड़ी 250 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। कई बिजली ट्रांसफार्मर और पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं। कई वाहन भी मलबे, पत्थर आदि से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

मौसम विभाग के अलर्ट के बीच शुक्रवार को सोलन और सिरमौर में शिक्षण संस्थान बंद रहे। वहीं कालका शिमला रेल ट्रैक पर पत्थर गिरने से ट्रेन घंटों फंसी रही। शुक्रवार को रोहतांग दर्रा सहित ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी हुई तथा निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला चलता रहा।

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुंचने से झमाझम बारिश हो रही है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, विशेषतौर पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तो बारिश प्रचंड चरण में है। दोनों राज्यों में मूसलाधार बारिश से नदियां और पहाड़ी नाले उफान पर आ गए हैं, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने तबाही मचा दी है।

उत्तराखंड के यमुनोत्री हाईवे के साथ दोनों राज्यों में सैकड़ों मार्ग अवरुद्ध हैं और कई संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को मूसलाधार बारिश से स्थिति इतनी भयावह बन गई कि कई क्षेत्रों में स्कूलों को बंद करना पड़ा। मौसम विभाग की ओर से इन दोनों राज्यों सहित उत्तर-पश्चिम भारत और देश के कई अन्य हिस्सों में आने वाले तीन-चार दिनों तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

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