उत्तराखंड : उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमेशा ही एक बड़ी चुनौती रहा है। इसके पीछे का मुख्य कारण दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती और उनका लंबे समय तक वहां न रुकना रहा है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग इस समस्या से निजात पाने के लिए खास तैयारी कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग आउटसोर्सिंग के जरिए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए पॉलिसी तैयार कर रहा है। इस योजना के तहत डॉक्टरों को दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्त किया जाएगा ताकि, वहां उपलब्ध स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर का सही इस्तेमाल किया जा सके और साथ ही स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी मिल सके।

विदित हो कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी काफी ज्यादा है। इस वजह से मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में इलाज कराने जाना पड़ता है। जबकि, उत्तराखंड सरकार यू कोट वी पे योजना के तहत चिकित्सकों को मुंहमांगा पैसा देने के लिए भी तत्पर तैयार है, बावजूद इसके विशेषज्ञ डॉक्टरों के तकरीबन 45 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 1200 से अधिक पद सृजित हैं, जिसमें में 600 से अधिक पद वर्तमान में खाली चल रहे हैं। इन पदों को भरना स्वास्थ्य विभाग के लिए के बड़ी चुनौती बना हुआ है। यू कोट वी पे योजना के तहत चिकित्सकों को अधिकतम 06 लाख रुपए प्रति माह सैलरी देने की व्यवस्था है, वहीं निजी अस्पतालों में उन्हें लगभग 08 लाख रुपए की सैलरी मिल रही है।

प्रदेश के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों को पहुंचाने के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से पहले भी तमाम प्रयास किए जा चुके हैं। जिसके तहत यू कोट वी पे योजना के जरिए विशेषज्ञों को अधिकतम 04 लाख और सुपर स्पेशलिस्ट को 06 लाख रुपए प्रति माह मानदेय दिए का प्रावधान किया गया है, लेकिन दुर्गम क्षेत्रों में जाने के लिए डॉक्टरों ने कोई विशेष उत्सुकता नहीं दिखाई।

इसके अतिरिक्त इन क्षेत्रों में चिकित्सकों रुक कर अपनी सेवाएं प्रदान करें, इसके लिए वर्ष 2024 में स्वास्थ्य विभाग ने कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में काम करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को 50 फीसदी अतिरिक्त भत्ता देने का भी निर्णय भी लिया था, लेकिन इसका भी कुछ विशेष असर देखने को नहीं मिल सका।

इस चुनौती से पार पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों को भरने के लिए आउटसोर्स का सहारा लेने का फैसला लिया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पॉलिसी भी तैयार कर रहा है। स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसके तहत पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिल गई है और साथ ही एम्स किच्छा सैटेलाइट सेंटर में अगले महीने से ओपीडी प्रारंभ होने की उम्मीद है।

उनके मुताबिक मैन पावर को लेकर समस्या अवश्य उत्पन्न है, विशेषकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ कैडर के चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में एक नई पॉलिसी तैयार की जा रही है, जिसके तहत आउटसोर्स के जरिए अच्छे चिकित्सकों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर्स की कमी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि, पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों को 50 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन दिया जा रहा है। इसके साथ ही यू कोट वी पे योजना के तहत स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को तकरीबन 5.75 लाख रुपए प्रति माह वेतन प्रदान करने का प्रावधान भी है।

इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में वीकली वॉक इन इंटरव्यू का प्रावधान है। इसी तरह डीजी हेल्थ ऑफिस में हर महीने दूसरे और आखिरी मंगलवार को वॉक इन इंटरव्यू होता है। इसके माध्यम से चिकित्सकों का चयन किया जाता है।

फिलहाल, प्रदेश में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को ढर्रे पर लाने के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन्हें सफलता कम ही मिल पा रही है। डॉक्टर पहाड़ चढ़ने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा पहाड़ के अस्पतालों में संसाधनों की भी भारी कमी है, जिसके चलते मरीजों या घायलों को मजबूरीवश भी अन्य अस्पताल में या फिर हायर सेंटर ले जाना पड़ता है।

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