उत्तराखंड : उत्तराखंड में जंगल की आग चुनौतीपूर्ण हो गई है। विगत 16 वर्षों में 18 हजार से अधिक वनाग्नि की हुई घटनाओं में वन संपदा बुरी तरह प्रभावित हुई है। उत्तराखंड में जंगल की आग और औसत से ज्यादा बारिश चुनौती बन कर सामने खड़ी है। विशेषज्ञ इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मान रहे हैं। सर्दियों में औसत से कम बारिश और बर्फबारी से जंगल शुष्क होकर सुलग रहे हैं।
जुलाई और अगस्त में जरूरत से अधिक बारिश हो रही है, जिससे कम समय में तेज बारिश से भी नुकसान पहुंच रहा है। प्रदेश में 36000 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र है, जहां प्रत्येक वर्ष आग लगती है। प्रदेश में वर्ष 2010 से 2025 के बीच 18000 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में तीस हजार हेक्टेयर से ज्यादा की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।
वन विभाग के मुताबिक, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल और पिथौरागढ़ जिले वनाग्नि की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील हैं। मुख्य वन संरक्षक के अनुसार वनाग्नि से पर्यावरण प्रभावित होता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ने से आग का खतरा भी बढ़ रहा है। सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी से जंगल शुष्क हो जाते हैं, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। यह मौसम परिवर्तन जलवायु परिवर्तन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
नवंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 के मध्य 60 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं गठित हुईं। इस दौरान नंदा देवी बायोस्फीयर के जंगलों में आग लगी थी। आग पहाड़ियों की चोटियों तक पहुंच गई थी, जिसपर बहुत मुश्किल के बाद काबू पाया गया। जंगल की आग की घटनाओं में करीब 85 हेक्टेयर जैव विविधता को नुकसान पहुंचा है।
राज्य में बारिश की प्रवृत्ति में भी बदलाव आ रहा है। जुलाई 2025 में औसत से कम बारिश हुई जबकि वर्ष 2022, 2023 और 2024 में यह अधिक रही। अगस्त 2024 और 2025 में भी औसत से अधिक बरसात दर्ज हुई। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के अनुसार, कम समय में तेज बारिश से समस्या बढ़ गई है। पिछले वर्ष हर्षिल, धराली सहित कई स्थानों पर बड़ी आपदाएं आई थीं। साथ ही थराली छेनागाड आदि स्थानों पर आपदा से नुकसान पहुंचा था।
राज्य के नैनीताल जिले में भी बढ़ती गर्मी और हीट वेव के चलते जंगलों में आग की घटनाएं वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विभाग के दावे और तैयारियां इस बार गर्मी के असर के आगे कम पड़ती नजर आ रही हैं।
पिछले वर्ष फायर सीजन के दौरान जंगलों में आग की छह घटनाएं दर्ज की गईं जिनसे करीब 3.30 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। इस वर्ष फायर सीजन में 15 फरवरी के बाद अब तक तीन प्रमुख घटनाएं सामने आ चुकी हैं। डीएफओ के अनुसार विभाग की टीमें लगातार अलर्ट मोड पर हैं। वनाग्नि पर काबू पाने के लिए फायर वाचर, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय निवासियों की मदद ली जा रही है।
