उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन की जांच एसआईटी को सौंपी गई है और इसका नेतृत्व एडीसीपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। इसमें 10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया हैं। एसआईटी दर्ज मामलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपेगी।
बता दें कि वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 13 अप्रैल को नोएडा में श्रमिकों ने हिंसक प्रदर्शन किया था। श्रमिकों के इस हिंसक प्रदर्शन की जांच के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने विशेष जांच दल यानि एसआईटी का गठन किया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि एसआईटी बनने से जांच शीघ्रता से पूरी होगी। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था के मुताबिक मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। हिंसक प्रदर्शन के दौरान मिली जानकारी व तथ्यों का गहनता से पता लगाया जा रहा है। चिह्नित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए स्वॉट, सीआरटी समेत छह टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा भी कर रही है। विदित हो कि 13 अप्रैल को नोएडा और ग्रेनो में 83 जगह पर प्रदर्शन हुए थे और इनमें 42 हजार से अधिक लोग शामिल पाए गए थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन को हिंसक बनाने में बाहरी तत्वों ने अहम भूमिका निभाई थी। इस मामले में अब तक 11 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं जिनमें 2000 से ज्यादा अज्ञात के शामिल होने की बात सामने आई है। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी आदित्य आनंद सहित 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रदर्शन के दौरान सीसीटीवी कैमरों को निष्क्रिय करने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया था। कई फुटेज में महिलाएं कैमरों पर कपड़ा डालती नजर आ रही हैं। पुलिस को एक ऑडियो और मैसेज भी मिला है जिसमें गोली चलाने की बात कही गई थी। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आंदोलन की आड़ में नोएडा के औद्योगिक उत्पादन को पूरी तरह से ठप करने की साजिश रची गई थी।
पुलिस ने मास्टरमाइंड आदित्य आनंद की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है जिस पर 24 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई होनी है। साथ ही आरोपी के साथियों को भी पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रदर्शन में युवतियों की भूमिका समेत कई अन्य पहलुओं पर भी पुलिस की पूछताछ जारी है। युवतियों के आदित्य आनंद से संबंध पर भी पुलिस ने जानकारी एकत्रित की है। पूछताछ में कुछ अहम सुराग पुलिस के हाथ लगे हैं जिनमें यह भी पता चला है कि मजदूर बिगुल संगठन श्रमिकों को भड़काने के लिए आनलाइन पोर्टल का भी इस्तेमाल किया जाता था।
सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में श्रमिकों के इलाज में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए श्रमिक सहायता डेस्क प्रारंभ कर दिए गए हैं। अस्पताल की सीएमएस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिलाधिकारी के निर्देश पर दो सहायता डेस्क शुरू किए गए हैं जिनमें से एक रजिस्ट्रेशन काउंटर के समीप और दूसरा इमरजेंसी में है।
पुलिस ने आरोपियों से बरामद मोबाइल और लैपटॉप से कई जानकारियां प्राप्त की हैं। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए गूगल से सहायता मांगी गई है। सभी डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी और साथ ही उस एक्स हैंडल की जांच भी जारी है जिसे पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था। बता दें कि इसी हैंडल के जरिये हिंसा भड़काई गई थी।
