नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को पार्टी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। राघव के अलावा राजिंदर गुप्ता, दीप पाठक, अशोक मित्तल, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, विक्रजीत सिंह साहनी के अलावा दिल्ली से आप की राज्यसभा सांसद स्वाती मालिवाल भी भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गईं।

भाजपा मुख्यालय पहुंच कर राघव ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन मुलाकात की। आप पार्टी छोड़ कर भाजपा से जुड़ने के पश्चात राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भाजपा मुख्यालय पहुंचे और तीनों नेताओं ने भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। भाजपा मुख्यालय में भेंट स्वरूप गुलदस्ते देकर तीनों का स्वागत किया और उनका मुंह मीठा कराया। इसके बाद औपचारिक फोटो सेशन किया गया।

राघव ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आज संविधान के प्रावधानों के तहत यह बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। कुल सात सांसदों ने इस विलय संबंधी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इन दस्तावेजों को राज्यसभा के माननीय सभापति को सौंपा गया। तीन सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से ये हस्ताक्षरित दस्तावेज सौंपे।

राघव चड्ढा ने राज्य सभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए भाजपा में विलय कर लेंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि स्वाति मालीवाल और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह भी भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपने खून-पसीने से पार्टी को सींचा और अपनी जवानी के 15 साल पार्टी को बनाने में लगा दिए। उनके अनुसार, पार्टी अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब देश या राष्ट्रीय हित के स्थान पर व्यक्तिगत लाभ के लिए कार्य कर रही है। ऐसे में चड्ढा ने यह महसूस किया कि वह गलत पार्टी में सही आदमी हैं।

इस अवसर पर संदीप पाठक ने कहा कि मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि ऐसी स्थिति आ जाएगी, परन्तु आ गई। मैं किसान परिवार से हूं और मैं राजनीति में सिर्फ इस मकसद से आया कि देश के लिए कुछ बड़ा काम कर सकूं। मैं देश सेवा का मकसद लेकर ही आम आदमी पार्टी में जुड़ा था।

दरअसल केजरीवाल और राघव चड्ढा में दूरियां उसी समय से नजर आने लगी थी जब केजरीवाल जेल में थे और राघव अपनी पत्नी परिनीति के साथ लंदन में घूम फिर रहे थे और मस्ती भरे पलों की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे थे।

नतीजतन राघव को लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा गया। वे श्री आनंदपुर साहब सीट पर औपचारिक रूप से ही नजर आए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर भी अपेक्षाकृत शांत और विमुख नजर आ रहे थे।

विपक्ष जहां इसे आप पार्टी के अंदरूनी मतभेद का संकेत बता रहा है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दे रहे हैं।

राज्यसभा में अब आम आदमी पार्टी के इकलाैते सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल बचे हैं। पंजाब में वर्ष 2000 में कार सेवा शुरू करके संत सीचेवाल ने गुरु नानक देव जी से जुड़ी ऐतिहासिक नदी काली बेई का कायाकल्प करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। विदित हो कि उनके प्रयास से ही औद्योगिक व मानवीय प्रदूषण से जाम 160 किलोमीटर लंबी काली बेई साफ हो सकी थी।

आज काली बेई देश में न केवल एक रोल माडल के रुप में देखी जाती है, बल्कि आज वह जगह एक पिकनिक स्थल के रुप में विकसित हो चुकी है। सड़कों वाला बाबा, वेलफेयर बाबा, बेईं वाले बाबा और ईको बाबा से विख्यात संत सीचेवाल ने अपने हाथों से बेईं से कांग्रेस बूटी निकाली थी। शुरुआती दौर में अकेले चलने वाले संत सीचेवाल के प्रयास लोक लहर बन चुके हैं।

आम आदमी पार्टी को इस टूट का आभास हो गया था। राघव चड्ढा की प्रेस कांफ्रेंस से कुछ देर पहले पार्टी के पंजाब महासचिव और मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने अमित शाह पर आम आदमी पार्टी को तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया। पन्नू ने चड्ढा पर भी आरोप लगाया था कि वह आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों को तोड़ने की कोशिश में जुटे हैं। अमित शाह ने राघव चड्ढा को आप सांसद तोड़कर लाने पर केंद्रीय मंत्री बनाने का आश्वासन दिया है। ईडी की रेड को जरिया बनाकर सांसदों पर पार्टी में शामिल होने का दबाव बनाया जाता है।

आम आदमी पार्टी के सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबर के बीच फरीदाबाद इकाई में संगठनात्मक गतिविधियां तीव्र हो गई हैं। जिला अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर मौजूदा स्थिति पर चर्चा की और आगे की रणनीति तैयार की।

बैठक में उन्होंने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम से पार्टी की मजबूती और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उन्होंने बल देकर कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है बल्कि यह कार्यकर्ताओं और विचारधारा पर आधारित संगठन है। ऐसे में यदि कुछ लोग व्यक्तिगत कारणों से पार्टी छोड़ रहे हैं तो इससे संगठन की जड़ों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर सक्रियता बनाए रखने और जनता से निरंतर संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया। साथ ही आने वाले समय में संगठन को और अधिक मजबूत करने के लिए बूथ स्तर तक गतिविधियां बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया।

जिलाध्यक्ष ने केंद्र की एजेंसियों के दबाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं लेकिन पार्टी का कार्यकर्ता इन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रहेगा। बैठक के अंत में कार्यकर्ताओं ने एकमत होकर पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और ईमानदार राजनीति के एजेंडे को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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