हिमाचल प्रदेश :  हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 9 साल के पश्चात दोबारा से अपार्टमेंट एक्ट को लागू करने का फैसला लिया गया है। एक्ट लागू होने के बाद सरकार बिल्डरों से एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज यानि ईडीसी की वसूली शुरू कर देगी। 

हिमाचल प्रदेश के सोलन में चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में कायदे कानूनों को ताक पर रखकर हुए निर्माण से सीख लेते हुए सरकार ने 9 साल बाद प्रदेश में अपार्टमेंट एक्ट को दोबारा लागू करने का फैसला किया है। एक्ट लागू हो जाने के पश्चात प्रदेश में आवासीय परियोजनाओं के मनमाने निर्माण पर अंकुश लगेगा और बाह्य विकास शुल्क यानि ईडीसी की वसूली प्रारंभ हो जाएगी, जिससे प्रदेश की आय में भी वृद्धि होगी।

अपार्टमेंट एक्ट के तहत नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक को नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री ने इसकी पुष्टि की है।

समाचार पत्रों ने चेस्टर हिल परियोजना में नियमों की अनदेखी को लेकर निरंतर खबरें प्रकाशित की थी और ग्राउंड रिपोर्ट में भी मौके पर बरती जा रही अव्यवस्थाओं का खुलासा किया था। इसका संज्ञान लेते हुए अब राज्य सरकार ने बिल्डरों पर नकेल कसने के लिए अपार्टमेंट एक्ट दोबारा से लागू करने का फैसला किया है।

एक्ट लागू हो जाने के बाद सरकार बिल्डरों से एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज की वसूली भी शुरू कर देगी। इसके लिए दरें नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की ओर से प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से नगर निगम क्षेत्रों, नियोजित क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग – अलग तय की जाएंगी।

बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बिल्डरों से सार्वजनिक सुविधाओं जैसे पानी, सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था के लिए ईडीसी लिया जाता है। बता दें कि प्रदेश में आवासीय परियोजनाओं मतलब अपार्टमेंट एक्ट के तहत होने वाले निर्माण पर नियंत्रण रखने के लिए बनाया गया हिमाचल प्रदेश अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट, 2005 सितंबर 2005 में लागू किया गया था।

आवासीय परियोजनाओं से संबंधित पूरी प्रक्रिया पहले हिमुडा देखा करता था। परंतु केंद्र सरकार द्वारा 2016 में रेरा लागू किए जाने के बाद कानूनी एकरूपता लाने और दोहरे कानूनों से पैदा होने वाली जटिलताओं को समाप्त करने के उद्देश्य से अपार्टमेंट एक्ट को निरस्त कर दिया गया था।

अब आवासीय परियोजनाओं में बिना पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के डवेलपर को ईसी यानि एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। हाल ही में चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में पानी और रास्ते की कमी को लेकर हुए विरोध के फलस्वरूप यह फैसला लिया गया।

अब पर्याप्त जल आपूर्ति और सड़क संपर्क सुनिश्चित होने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। साथ ही पुराने और निर्माणाधीन प्रोजेक्टों की जांच के लिए विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा, जो अनियमितताओं की पहचान कर उनका समाधान प्रस्तुत करेगी।

प्रदेश सरकार ने प्रदेश में बनने वाले आवासीय प्रोजेक्टों के लिए बिल्डरों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकरण होने के बाद यदि निर्माण के दौरान नियमों की अवहेलना की जाती है तो सरकार बिल्डर पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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