हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश सरकार ने सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए निर्देशित किया कि किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव और सिफारिश से तबादला-पोस्टिंग करवाने की चेष्टा न की जाए।
ऐसा प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। विदित हो कि सेवा संबंधी मामलों में नियमों को दरकिनार कर प्रॉपर चैनल तोड़ने के फलस्वरूप सरकार ने यह संज्ञान लिया है। कार्मिक विभाग ने सचिवालय की सभी अनुभाग अधिकारियों को इस विषय में मेमोरेंडम जारी कर दिया है। सरकार के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं जिनमें कई कर्मचारी विभागीय प्रक्रिया अपनाने के स्थान पर सीधे उच्च अधिकारियों को आवेदन भेज रहे हैं।
कुछ मामलों में तो थ्रू प्रॉपर चैनल या एडवांस कॉपी लिखकर आवेदन भेज दिए गए, जबकि संबंधित विभाग को उसकी जानकारी तक प्रदान नहीं की गई। कार्मिक विभाग ने इसे कार्यालय नियमों का उल्लंघन मानते हुए सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को भविष्य में ऐसी गतिविधियों से बचने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि कार्यालय नियमावली के पैरा 8.5 के मुताबिक किसी भी कर्मचारी द्वारा सीधे उच्च अधिकारियों को पत्र या प्रतिवेदन नहीं भेजा जा सकता।
मेमोरेंडम में केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 1964 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपना निजी हित साधने के लिए राजनीतिक या बाहरी प्रभाव का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इसमें तबादले और पोस्टिंग से जुड़े मामले भी सम्मिलित हैं।
यदि कोई कर्मचारी किसी मंत्री, विधायक या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश करता पाया गया तो उसके खिलाफ सीसीएस (कंडक्ट) रूल्स के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि सरकारी कर्मचारी हर समय ऐसा आचरण अपनाएं जो एक जिम्मेदार सरकारी सेवक के अनुरूप हो। नियमों के विपरीत गतिविधियों को अनुचित आचरण माना जाएगा। कार्मिक विभाग द्वारा सभी अनुभाग अधिकारियों, निजी सचिवों, अधीक्षकों, वरिष्ठ सहायकों, स्टेनोग्राफरों, क्लर्कों और अन्य कर्मचारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है
सरकार द्वारा सचिवालय प्रशासनिक विभाग में निजी स्टाफ के कैडर का पुनर्गठन भी किया गया है। इसके तहत पर्सनल असिस्टेंट के स्वीकृत पद घटाकर 43 से 33 कर दिए गए हैं, जबकि वरिष्ठ स्केल स्टेनोग्राफर के पद 23 से बढ़ाकर 33 कर दिए गए हैं। सचिवालय में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पदानुक्रम को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से यह बदलाव किए गए हैं।
उधर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी कार्यालय और अदालतों में मर्यादित, औपचारिक और सादे रंगों के कपड़े पहन कर उपस्थित हों। सर्कुलर में कहा गया है कि सरकारी सेवकों का आचरण केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियां भी सेवा नियमों के दायरे के अंतर्गत आएंगी।
किसी भी सरकारी नीति या मुद्दे पर की गई अनधिकृत टिप्पणी, पोस्ट, स्टोरी या ब्लॉग साझा करना अनुशासनहीनता माना जाएगा। हाल के दिनों में यह सामने आया है कि कई कर्मचारी विभागीय निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं।
इसे देखते हुए सभी विभागाध्यक्षों और अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों, प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों-कर्मचारियों को भी इन नियमों से अवगत कराएं और उनका कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करें। सरकार ने केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम 1964 का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारी ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकते, जो सरकारी सेवक की छवि के अनुरूप न हो।
नियमों के अनुसार कोई भी कर्मचारी ऐसी सार्वजनिक टिप्पणी, बयान या अभिव्यक्ति नहीं कर सकता जिससे सरकार की नीतियों की आलोचना हो या सरकार की छवि धूमिल या प्रभावित हो। साथ ही कोई भी कर्मचारी बिना अनुमति के आधिकारिक दस्तावेज या उससे जुड़ी जानकारी किसी अन्य के साथ साझा नहीं कर सकता।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज सचिवालय जैसे संवेदनशील प्रशासनिक संस्थान में कर्मचारियों का पहनावा और व्यवहार गरिमामय, शालीन और पेशेवर होना चाहिए। कर्मचारियों का आचरण सरकार की कार्य संस्कृति और प्रशासनिक अनुशासन को दर्शाता है। यदि कोई कर्मचारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सेवा नियमों और नियुक्ति शर्तों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
