हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में जंगल धधक रहे हैं। राज्य में वनों में आग की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले दोगुना से ज्यादा होकर 260 तक पहुंच गई हैं। इस साल बीते गुरुवार तक डावल से लगभग 85 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।
कोटखाई में जंगल की आग से काली माता मंदिर जलकर खाक हो गया। सोलन के जंगलों में लग रही आग का असर कालका-शिमला रेललाइन पर भी देखने को मिल रहा है। बुधवार को आग के चलते सनवारा के समीप दो रेलगाड़ियां घंटों एक जगह खड़ी रहीं। रेलवे ट्रेक के आसपास आग लगने के चलते दोनों ट्रेनों को रोक दिया गया था।
घटना की सूचना पर रेलवे बोर्ड की टीमों के अलावा वन विभाग, अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची तब जाकर आग पर काबू पाया गया। जुखाला के मंगरोट जंगल में भी आग भड़की और साथ ही सोलन के डगशाई, देवठी और शमलेच के जंगल में भी आग की तेज लपटें उठीं। ऊना के बंगाणा उपमंडल की रागगढ़ धार रेंज में भी आग से नुकसान पहुंचा है।
कोटखाई के शिलड़ू गांव के पास जंगल में भीषण आग लग गई। आग रिहायशी इलाके तक पहुंच गई थी। शिलड़ू गांव के पास जंगल के साथ स्थित काली माता मंदिर भी पूर्ण रूप से जल गया। बिलासपुर के कई वन क्षेत्रों में भी बुधवार रात्रि भड़की आग ने भारी तबाही मचाई। आग की चपेट में आकर बहुमूल्य वन संपदा राख हो गई। जुखाला क्षेत्र के मंगरोट जंगल में बुधवार देर रात को अचानक आग लगने की सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया।
जिला मुख्यालय सोलन और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में भड़की जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते सप्ताह लगी इस भीषण आग की चपेट में आने से कई जंगल धधक रहे हैं। डगशाई, देवठी और शमलेच के जंगल में उठती तेज लपटें और धुआं दूर से ही देखा जा सकता है।
वन विभाग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, जिला मुख्यालय की करीब 130 हेक्टेयर वन भूमि पूर्ण रूप से आग की भेंट चढ़ चुकी है। ऊना जिले में करीब 25 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। इससे एक पशुशाला भी आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गई।
वर्तमान फायर सीजन में हमीरपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों की 21 बीटों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सबसे अधिक नुकसान वन बीट कुठेड़ा को पहुंचा है। यहां पर फायर सीजन से पहले काटे गए पेड़ के स्लीपर जलकर राख हो गए। चंबा में पिछले दिनों बनीखेत के बौंखरी मोड़ गांव में एक पाइप के गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई थी। आग से धुएं के गुब्बार उठने लगे और पूरा गोदाम जलकर खाक हो गया।
कुल्लू की ऊझी घाटी स्थित नग्गर के जंगल में बीती 26 मई को देर रात्रि आग भड़क उठी थी। इस आग की वजह से देवदार और काईल के छोटे पौधे झुलस गए। दमकल विभाग की टीम नग्गर से पैदल चलकर मौके पर पहुंची थी और कड़ी मशक्कत के उपरांत आग पर काबू पाने में सफल रही थी।
इस वर्ष 15 अप्रैल से 28 मई के मध्य हिमाचल प्रदेश में डावल की घटनाओं में तकरीबन दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान कुल 260 वन आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में मंडी, धर्मशाला और नाहन वन मंडल हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अबतक लगभग 3310 हेक्टेयर क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ है, जिसमें तकरीबन 2830 हेक्टेयर प्राकृतिक वन क्षेत्र है। इसके अलावा वन अग्नि से पौधरोपण क्षेत्र और अन्य भूमि भी प्रभावित हुई है।
हिमाचल की राजधानी के जंगलों में आग लगने का सिलसिला निरंतर जारी है, जिससे बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है और इसका पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। टुटीकंडी स्थित मानसिक रोगी अस्पताल के पास भी आग लगने की घटना सामने आ चुकी है। इस आग पर एक बार काबू पा लिया गया था लेकिन रात को दोबारा से आग भड़क गई।
शिमला बाग गांव के समीप गुरुवार को जंगल में लगी आग से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। आग फैलते हुए मानसिक रोगी अस्पताल के समीप तक पहुंच गई, लेकिन अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की कड़ी मशक्कत के उपरांत आग पर काबू पा लिया।
इसके अतिरिक्त जुन्गा के जंगलों में भी वीरवार सवेरे आग भड़क उठी, जो देखते ही देखते काफी बड़े क्षेत्र में फैल गई। वहीं रझाना के जंगलों में पिछले दो दिनों से लगी आग पर बामुश्किल काबू पाया जा सका। लगातार प्रयासों के बावजूद बुधवार तक आग निरंतर सुलगती रही और जंगल का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया है।
पांजड़ी क्षेत्र में भी आग लगने की घटना सामने आई हैं। टुटीकंडी से सटे पांजड़ी के कब्रिस्तान क्षेत्र में अचानक आग लग गई। वन विभाग की टीम सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची और दमकल विभाग के साथ मिलकर आग बुझाने का कार्य प्रारंभ किया। इस अग्निकांड में कब्रिस्तान की लगभग 0.11 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है।
शिमला के डिप्टी रेंजर के अनुसार सूचना मिलते ही टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई थी और शाम तक आग पर नियंत्रण पा लिया गया। बालूगंज अग्निशमन केंद्र के फायर ऑफिसर ने बताया कि मानसिक रोगी अस्पताल के आसपास के जंगल में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिस पर काबू पाने के लिए विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही है।
इन घटनाओं में जंगल की वनस्पति और छोटे वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक कुल नुकसान का आकलन नहीं हो पाया है।
