पंजाब/ चंडीगढ़
संवाददाता : अनिल सौदा
सोमवार को पंजाब विधान सभा में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक प्रेस वार्ता आयोजित की। प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि पंजाब विधान सभा का मॉनसून सेशन शुरू हो गया है जोकि 10 अगस्त तक चलेगा।
मानसून सेशन में सोमवार को शिक्षा प्रणाली और पेपर लीक मामलों में डिबेट रखी गई थी इस पर प्रस्ताव लाया गया और लगभग सभी विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इसका बॉयकॉट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के पेपर दे देने के 2 दिन के बाद जब उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है, तो वह बहुत आहत होते हैं।
सीएम ने कहा कि कुछ विद्यार्थी इस वजह से आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं। जब विद्यार्थी अपना हक मांगते है तो उन पर लाठीचार्ज किया जाता है और आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं। केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लिया जाता है परंतु जब वह मंत्री संस्थान में जाते है तो उन पर फूलों की बारिश की जाती है।
आज पंजाब विधान सभा में निंदा प्रस्ताव लाया गया है। केंद्रीय शिक्षा विभाग प्रधानमंत्री कार्यालय के गृह मंत्रालय में इससे संबंधित पत्र भेज दिए गए हैं। आज देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। NEET जैसी परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में तकरीबन 93 पेपर लीक हुए हैं, जिनसे करोड़ों की संख्या में विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं।
प्रत्येक पेपर लीक मामले में CBI से जांच करा ली गई है किंतु अभी तक किसी को सजा नहीं मिल पाई। प्रधानमंत्री कहते हैं कि अब इसका फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट करेगा।
हमारे विद्यार्थी अपने देश से इंजीनियरिंग या डॉक्टर की डिग्री प्राप्त करके जब विदेश जाते हैं, तो उनको वहां दोबारा पढ़ाई करनी पड़ती है।इसका कारण यह है उनको हमारी शिक्षा प्रणाली पर विश्वास नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निंदा प्रस्ताव लाने का कारण यह है कि जंतर मंतर पर किए गए धरने प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों पर दर्ज की गई FIR रद्द की जाए। जिन विद्यार्थियों की इस प्रदर्शन के दौरान मृत्यु हो गई है, उन्हें 1 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए और भविष्य में इस तरह की दुखद घटना न दोहराए जाने का आश्वासन दिया जाए।