उत्तराखंड : उत्तराखंड में बढ़ते मामलों के पश्चात साइबर क्राइम पोर्टल पर एनोनिमसली शिकायत दर्ज कराने का विकल्प खुल गया है। ऐसा देखा गया है कि बहुत से लोग पहचान उजागर होने के डर और शर्म के चलते उत्पीड़न की  शिकायत दर्ज नहीं कराते।

आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबर अपराध के मामलों में निरंतर इजाफा हो रहा है। प्रायः कई बार पीड़ित अपनी पहचान उजागर होने के डर या शर्म की वजह से शिकायत दर्ज नहीं कराते। अब ऐसे लोगों के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर गुमनाम शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

पोर्टल पर मुख्यतः महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की शिकायत बिना पहचान बताए दर्ज कराई जा सकती है। इसके लिए पीड़ित को सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर वुमेन/चिल्ड्रन रिलेटेड क्राइम सेक्शन खोलना होगा। इसके उपरांत रजिस्टर एनोनिमसली विकल्प चुनकर शिकायत प्रक्रिया प्रारंभ की जा सकती है।

शिकायत दर्ज करने के दौरान घटना का प्रकार, तिथि, समय और संबंधित प्लेटफॉर्म की जानकारी भरनी होती है। साथ ही राज्य और जिला चयन करने के बाद आरोपी की आईडी, प्रोफाइल लिंक या यूआरएल जैसी जानकारी भी अपलोड की जा सकती है। पीड़ित स्क्रीनशॉट, चैट रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल सबूत भी पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। सभी विवरण सत्यापित करने के पश्चात कन्फर्म और सबमिट पर क्लिक करते ही शिकायत दर्ज हो जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत डिजिटल साक्ष्य शिकायत की जांच और कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धमकी, फर्जी प्रोफाइल, अश्लील संदेश, ब्लैकमेलिंग या सोशल मीडिया उत्पीड़न के मामलों में स्क्रीनशॉट और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखना आवश्यक है।

लोग कई मर्तबा पहचान उजागर होने की डर से शिकायत दर्ज कराने में हिचकिचाते हैं। इसको देखते हुए साइबर क्राइम पोर्टल पर ऐसी व्यवस्था है कि आप अपनी पहचान उजागर किए बिना शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सिर्फ लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक होने की जरुरत है। साइबर ठगी या ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार बनने पर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करके अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके साथ साथ लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने की बहुत ज्यादा जरूरत है।

साइबर पुलिस ने लोगों से फेक लोन ऐप्स के बढ़ते खतरे को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें साइबर ठग आसान और तुरंत लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं।

एसएसपी एसटीएफ के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आसान लोन के आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसे ही व्यक्ति लिंक पर क्लिक कर ऐप इंस्टॉल करता है, ऐप उसके मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी और अन्य निजी डाटा का एक्सेस ले लेता है। इसके उपरांत ठग पीड़ित की तस्वीरों को एडिट कर आपत्तिजनक फोटो बना  लेते हैं और उन्हें रिश्तेदारों व परिचितों को भेजने की धमकी देकर पैसे वसूलने शुरू कर दिए जाते हैं।

कई लोग बदनामी के डर से ठगों के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर भी कर देते हैं। साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान या बिना सत्यापन वाले लोन ऐप को कदापि डाउनलोड न करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले लुभावने विज्ञापनों और संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक करने से पहले इस पर अच्छे से विचार करें और पहले उसकी जानकारी एकत्रित करें। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और रिव्यू जांचना बहुत जरूरी है।

विशेषज्ञों ने ऑनलाइन खरीदारी और गेम्स से बढ़ते साइबर ठगी के खतरे को देखते हुए लोगों को सतर्क किया है। उनके अनुसार डिजिटल दुनिया में ऑनलाइन माध्यमों से डाटा चोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

लोगों की छोटी छोटी लापरवाहियां उन्हें ठगी का शिकार बना देती हैं। फर्जी ईमेल आईडी से गलत बैंक खाते भेजे जाते हैं और लोग बिना जांच किए भुगतान कर देते हैं। उन्होंने व्यापारियों को भुगतान से पहले खातों की जांच करने की सलाह दी और साथ ही छात्रों से ऑनलाइन गेम्स से दूर रहने की अपील की। कई गेम्स यूजर्स की निजी जानकारी एकत्र कर उसका दुरुपयोग करने लगते हैं।

18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मोबाइल उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए। विदित हो कि कई देशों में 16 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध है। 16 साल से पहले सोशल मीडिया पर सक्रिय होने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है। इंटरनेट सुविधाजनक होने के साथ साथ जोखिम से भरपूर भी है।

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