उत्तराखंड : उत्तराखंड में इस वर्ष मानसून सप्ताह भर की देरी से पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। मानसून से पहले पहाड़ से लेकर मैदान तक गर्मी अपने तीखे तेवर दिखा रही है। मैदान और पहाड़ दोनों ही जगह तापमान में बढ़ोतरी होने से उमस लोगों को खूब परेशान कर रही है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी देहरादून का अधिकतम तापमान पिछले कुछ दिनों में सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा तक़रीबन 36 डिग्री तक रिकॉर्ड किया जा रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान भी सामान्य से दो डिग्री इजाफे के साथ 25.डिग्री के आसपास दर्ज हो रहा है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी रही। आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंचने की संभावना बन रही है, परंतु उससे पहले गर्मी अपने तीखे तेवर दिखा रही है।
पारा चढ़ने से मैदानी इलाकों में गर्म हवाएं लोगों को खूब परेशान कर रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, आगामी तीन-चार दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंचने की संभावना है।
मानसून से पहले पर्वतीय इलाकों में हल्की बारिश गर्मी से राहत प्रदान कर सकती है, लेकिन तब तक मैदानी क्षेत्रों में गर्मी परेशान करती रहेगी। शनिवार के लिए पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में बिजली चमकने और गर्जन के साथ तेज़ रफ्तार से हवाएं चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तराखंड में मानसून के आने का इंतजार कर रहे लोगों की आस जल्दी ही पूरी हो सकती है। प्रदेशभर में अगले तीन-चार दिन में दक्षिण-पश्चिम मानसून पहुंचने की संभावना बन रही है। इस बीच प्रदेश में प्री मानसून बारिश की गतिविधियां भी चलती रहेंगी।
उत्तराखंड में अगले तीन-चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। इससे पहले बृहस्पतिवार को मानसून उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज, मोतिहारी से होकर गुजरा।
उत्तराखंड के लोक निर्माण एवम् सिंचाई मंत्री के अनुसार, प्रदेश में मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित किए गए हैं और 113 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। उनके द्वारा यह बात सिंचाई भवन सभागार में मानसून की तैयारियों को लेकर हुई सिंचाई और लोक निर्माण विभाग की बैठक में साझा की गई।
उन्होंने बताया कि सभी जनपद मुख्यालयों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। राजधानी देहरादून में भी एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे क्रियाशील बना हुआ है। केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के माध्यम से नदियों के बढ़ते – घटते जलस्तर और वर्षा के आंकड़े प्रतिदिन प्राप्त किए जा रहे हैं।
चारधाम यात्रा में सुरक्षा के मद्देनजर केदारनाथ हेली सेवा का संचालन इस बार मानसून आने से पहले बंद कर दिया गया है। डीजीसीए की ओर से 25 जून से आगे हेली सेवा संचालन की अनुमति प्रदान नहीं की गई है। अब मानसून सीजन समाप्त होने के पश्चात सितंबर से हेली सेवा दोबारा से संचालित की जाएगी।
विदित हो कि 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही हेली सेवा का संचालन शुरू कर दिया गया था। इस बार हेली सेवा के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण यानि यूकाडा ने नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आठ हेली ऑपरेटरों का चयन किया था। गुप्तकाशी, सिरसी, फाटा हेलिपैड से केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा संचालित की जाती है।
