हरियाणा : अरावली वन क्षेत्र में बढ़ रही अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग अब निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने पर मंथन कर रहा है। विभाग ने वन क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाने और कई संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा दीवार बनाने की कार्य योजना तैयार की है और इसके लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव अग्रसित कर दिया गया है।
विभाग का मानना है कि इन उपायों से अवैध निर्माण, कचरा फेंकने, पेड़ों की कटाई और जंगल में आग लगाने जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकेगीं
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बड़खल, सूरजकुंड रोड, अनंगपुर और मेवला महाराजपुर क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध निर्माण के मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विभाग ने जून और जुलाई में बड़ी कार्रवाई करते हुए ढाई सौ के करीब फार्म हाउस, बैंक्विट हॉल और मैरिज गार्डन को हटा दिया था। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने की वजह से कार्रवाई रुकी हुई है। लेकिन इसके बावजूद वन क्षेत्र में दोबारा से अतिक्रमण और अवैध निर्माण की शिकायतें निरंतर सामने आ रही हैं।
वन विभाग इन शिकायतों के मद्देनजर अरावली वन क्षेत्र में सीसीटीवी से निगरानी और संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा दीवार बनाने की योजना पर कार्य कर रहा है। इसके लिए वन विभाग द्वारा मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
वन विभाग के मुताबिक आसपास के कई व्यापारिक प्रतिष्ठान और रिहायशी कॉलोनियों द्वारा अरावली वन क्षेत्र में निरंतर कचरा फेंका जा रहा है। इस कचरे से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि वन्य जीवों के निवास और भोजन के प्राकृतिक क्षेत्र भी प्रभावित हो रहे हैं। दिनों दिन बढ़ रही इन समस्याओं को देखते हुए वन विभाग ने अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर ली है।
इस योजना के तहत वन क्षेत्र की सीमाओं पर सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाएगा, ताकि अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर रोक लगाई जा सके। साथ ही वन्य जीवों को सड़कों पर आने से रोकने का भी प्रयास किया जाएगा। विदित हो कि अक्सर भोजन और पानी की तलाश में वन्य जीव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
विभाग वन क्षेत्र में जाने वाले कुछ रास्तों को भी बंद या अवरुद्ध करने की तैयारी में है, ताकि निर्माण सामग्री लेकर वाहन भीतर प्रवेश न कर सकें। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सके और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
जिला वन अधिकारी के मुताबिक वन क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए दीवार बना दी गई है, जिससे काफी हद तक अतिक्रमण पर रोक लगी है। कैमरे लगाने का प्रस्ताव भी उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है।
इसके अलावा फरीदाबाद में सड़क किनारे सरकारी जमीनों और ग्रीन बेल्ट पर बढ़ते अवैध कब्जों ने भी प्रशासन की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। नगर निगम, एफएमडीए और एचएसवीपी की ओर से लगातार अभियान चलाने के बावजूद शहर में अतिक्रमण पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि अब फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-88 रोड को पायलट प्रोजेक्ट बनाते हुए स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया है। तकरीबन 1.50 करोड़ रुपए की लागत से यहां ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन की मजबूत फेंसिंग की जाएगी ताकि दोबारा कब्जे की गुंजाइश ही खत्म हो जाए।
फरीदाबाद में अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए सबसे महंगे और चुनौतीपूर्ण अभियानों में शुमार हो चला है। अधिकारियों के मुताबिक शहर में औसतन प्रत्येक सप्ताह विभिन्न जोनों में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने की आवश्यकता पड़ती है।
एक बड़े अभियान में पुलिस बल, जेसीबी मशीनें, डंपर, सफाई कर्मचारी और ट्रैफिक स्टाफ की तैनाती पर लाखों रुपए का व्यय हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, संयुक्त अभियान चलाने पर एक दिन में 5 लाख रुपए तक का प्रशासनिक खर्च आ जाता है, परंतु कई स्थानों पर अतिक्रमण मुक्त कराई गई जगह पर, कुछ दिनों बाद फिर से कब्जे शुरू हो जाते हैं।
नगर निगम और प्रशासनिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पिछले एक वर्ष में फरीदाबाद के अलग-अलग इलाकों में हजारों अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण हटाए गए। एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र में सड़क किनारे बनी अवैध दुकानों, शेड, रेहड़ियों और निर्माण सामग्री के कब्जों पर कठोर कार्रवाई की गई। कई बार एक ही स्थान पर बार-बार अभियान चलाने की आवश्यकता पड़ी।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक सबसे बड़ी समस्या नव विकसित की जा रही सड़कों और ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में सामने आती है। पहले खाली जमीन पर मलबा आदि डाल दिया जाता है, फिर उसके बाद धीरे – धीरे अस्थायी ढांचा खड़ा कर कब्जे का खेल शुरू हो जाता है। बाद में इन्हें हटाना कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तर पर काफी कठिन हो जाता है।
फरीदाबाद के सेक्टर-88, 85, 86 और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत की गई कि सड़क किनारे ग्रीन बेल्ट पर निर्माण सामग्री और मलबा डालने से बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। शहर के शहरी योजनाकारों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट केवल सौंदर्य के लिए नहीं होती बल्कि यह वर्षा जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फरीदाबाद जैसे तेजी से कंक्रीट होते जा रहे शहर में खुली जमीन निरंतर कम होती जा रही है। ऐसे में यदि ग्रीन बेल्ट पर कब्जे जारी रहते हैं तो भविष्य में जलभराव और प्रदूषण की समस्या और अधिक गंभीर हो जाने की आशंका बनी हुई है। पिछले मानसून में ग्रेटर फरीदाबाद की कई सड़कों पर घंटों पानी जमा रहने के पीछे भी अवैध भराव और बाधित ड्रेनेज को एक बड़ा कारण माना गया था।
शहरी विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सड़क किनारे और ग्रीन कॉरिडोर की जमीनें भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। यदि इन जमीनों पर स्थायी कब्जे हो जाते हैं तो बाद में सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन, सीवर लाइन और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार को भारी मुआवजा और पुनर्वास खर्च का बोझ उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक फरीदाबाद में सरकारी जमीनों पर बढ़ते कब्जों के फलस्वरूप अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों रुपये के राजस्व और सार्वजनिक संपत्ति का ह्रास हो रहा है। इनकी वजह से कई मामलों में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं क्योंकि कब्जे हटाने में कानूनी विवाद बाधा बन जाते हैं।
ग्रेटर फरीदाबाद आने वाले सालों में शहर का सबसे बड़ा रिहायशी और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनने जा रहा है। यहां निरंतर नई सोसाइटी, चौड़ी सड़कें और सार्वजनिक परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। ऐसे में यदि शुरुआती स्तर पर सरकारी जमीन और ग्रीन बेल्ट को संरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में शहर को भारी शहरी अव्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है।
