उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में सड़कों की मरम्मत और निर्माण में  लापरवाही को लेकर योगी आदित्यनाथ ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए उन्होंने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि जल जीवन मिशन के तहत खुदाई के साथ सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। कार्य पूरा होने के पश्चात तत्काल खोदी गई सड़कों और गड्ढों को भरा जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिलाधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर इसे देखेंगे और इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीएम ने कहा कि समय से कार्य पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार, प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी, जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर खुदी हुई सड़कों व गड्ढों की स्थिति का पता करेंगे। साथ ही इन्हें तत्काल भरना भी सुनिश्चित करवाएंगे।

इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले, काम को समय रहते पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए हैं। सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जल समाधान पोर्टल पर आपूर्ति, लीकेज व खुदाई से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता से किया जाए।

जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति या मरम्मत संबंधित शिकायतों के लिए लोग टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश में तकरीबन 2.50 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। विंध्य और बुंदेलखंड में शत-प्रतिशत के करीब लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सड़कों के लिए 50 करोड़ रुपये के प्रस्ताव लिए जाएंगे। इसके लिए पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने सभी जिलों से कार्ययोजना मंगाई है। यह कार्ययोजना जनप्रतिनिधियों से मिले प्रस्तावों के आधार पर तैयार की जाएगी।

सभी जिलों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में विधानसभावार जो कार्ययोजना बनी थी, उनमें जो काम बजट की सीमा के चलते स्वीकृत नहीं हो पाए थे, उन्हें इस बार की कार्ययोजना में स्वतः ले लिया जाए। विधायक अपने क्षेत्र में सड़कों के कार्य प्रस्तावित करेंगे। यदि ये कार्य 50 करोड़ रुपये से अधिक के होंगे, तो किन कामों को प्राथमिकता दी जानी है, यह भी जनप्रतिनिधि ही तय करेंगे।

प्रत्येक जिले में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के उपरांत जिलाधिकारी कार्ययोजना को अनुमोदित करेंगे। उसके बाद इसे पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भेज दिया जाएगा और फाइनल स्वीकृति शासन स्तर से मिलेगी।

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, 28 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां कैंटोनमेंट एरिया अधिक है फलस्वरूप वहां पीडब्ल्यूडी को काम कराने के लिए क्षेत्र ही नहीं बचता। इन विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों के कामों को कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी की योजना मई में ही कार्ययोजना का एक हिस्सा स्वीकृत कर देने का है, ताकि मानसून से पहले हर जिले में कुछ कार्यों को पूर्ण कराया जा सके।

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