उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में हुई 15 मौतों से व्यथित उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 25 जून को अपना जन्मदिन न मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ अग्निकांड में हुई जनहानि ने उनके मन को भीतर तक उद्वेलित और आहत कर दिया है।
उन्होंने अपने शोक संदेश में लिखा कि लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने मेरे मन को बेहद व्यथित कर दिया है। इस दुःखद घटना में अनेक मासूम बच्चों की असामयिक मृत्यु ने पूरे प्रदेश को शोक और पीड़ा से झकझोर दिया है।
उन्होंने कहा कि जब कई परिवारों के घरों के चिराग बुझ गए हों, तब ऐसे कठिन समय में अपने जन्मदिन का उत्सव मनाना उचित प्रतीत नहीं होता। इसी गहन संवेदना और शोक के भाव के साथ मैंने निर्णय लिया है कि कल, 25 जून को, मैं अपना जन्मदिन नहीं मनाऊंगा। मेरे जन्मदिवस वाला दिन उन दिवंगत मासूम बच्चों की पावन स्मृति तथा उनके शोकाकुल परिजनों के प्रति श्रद्धांजलि और संवेदना को समर्पित रहेगा।
उन्होंने कहा कि मेरी प्रभु श्रीहरि से प्रार्थना है कि वे इस अत्यंत हृदयविदारक, पीड़ादायक एवं दुर्भाग्यपूर्ण घटना में दिवंगत सभी बच्चों को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति दें तथा घायलों को शीघ्र पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।
उधर इस हृदयविदारक अग्निकांड की छानबीन में सामने आया है कि प्रतिष्ठान के मैनेजर, डायरेक्टर व उनके सहयोगियों ने फायर सेफ्टी के लिए कोई व्यवस्था नहीं की हुई थी। बिल्डिंग में आकस्मिक रूप से निकलने व प्रवेश करने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक बिल्डिंग में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे आग लगने पर धुंआ बाहर निकल सके। पुरनिया चौकी प्रभारी शुभम तिवारी की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में इसका जिक्र है।
एफआईआर में दर्ज सूचना के अनुसार, अलीगंज सेक्टर डी कॉलोनी के निकट लालबत्ती पुरनिया चौराहा यूपीएससी भवन के पीछे मकान नंबर 2813 में आग लगी थी। आग से पूरी इमारत के अंदर व सभी कमरों में धुआं भर गया था। धुएं के कारण दम घुटने से 15 लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि नौ घायल हो गए।
छानबीन करने पर पाया गया है कि प्रतिष्ठान के मैनेजर, डायरेक्टर व उनके सहयोगियों ने फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं की हुई थी। बिल्डिंग में आकस्मिक रूप से निकलने व प्रवेश का भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया था।
इस इमारत में आने-जाने का एक ही मुख्य रास्ता था। बिजली की व्यवस्था अनियमित तरीके से की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक बिल्डिंग में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे धुंआ बाहर निकल सके। इमारत में बेहद असुरक्षित तरीके से अंदर ही एसी के आऊटर व अन्य बिजली के उपकरण लगाए गए थे। सुरक्षा के उपाय नहीं होने से अग्निशमन कर्मियों व एनडीआरएफ ने किसी तरह दीवार को काटकर अंदर प्रवेश किया और बचाव कार्य को अंजाम दिया।
आरोपियों को इस बात की जानकारी थी कि ऐसी आकस्मिक स्थिति में लोगों की जान जा सकती है। इसके बावजूद आरोपियों ने जानबूझकर लापरवाही बरती। अग्निकांड के दौरान आसपास के घरों व फ्लैटों में भी आग फैलने की संभावना बन गई थी। घटना से वहां अगल-बगल के लोग भी काफी दहशत में आ गए थे।
लखनऊ के अलीगंज सेक्टर डी स्थित जिस चार मंजिला इमारत में विगत सोमवार को भीषण अग्निकांड हुआ, उसमें वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। बावजूद इसके बिल्डिंग के मालिक व संबंधित प्रतिष्ठानों के संचालकों ने बिजली विभाग से ऑडिट नहीं कराया था। अग्निकांड के पीछे यह बड़ी वजह भी निकलकर सामने आई है।
दमकल विभाग के मानक अनुसार व्यावसायिक इमारतों, अपार्टमेंट्स में प्रत्येक तीन साल में बिजली विभाग से ऑडिट कराना चाहिए। इससे बिजली पर बढ़ते भार और अन्य खामियों का समय रहते पता चल जाता है। हालांकि, अलीगंज की इमारत के मालिक व यहां चल रहे प्रतिष्ठान के मालिकों ने चंद रुपये बचाने के लिए कभी ऑडिट ही नहीं कराया। यह लापरवाही तब बरती गई जबकि इमारत में प्रतिदिन काफी लोगों की आवाजाही बनी रहती थी।
राजधानी के अलीगंज में हुए हादसे के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों के कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण का महाअभियान प्रारंभ कर दिया गया। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन विभाग, प्राधिकरण और विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की टीम ने कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी का गहन निरीक्षण किया।
राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, गाजियाबाद, कानपुर समेत अन्य शहरों में यह कार्रवाई की गई। इस दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर सौ से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। इनमें आकाश और एलन समेत कई बड़े संस्थान सम्मिलित हैं।
