उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में महीनों चले चिंतन और मंथन के पश्चात् सभी कयासों पर विराम लगाते हुए आखिरकार योगी-दो के कैबिनेट का दूसरा विस्तार संपन्न हो गया। इस विस्तार से सरकार और भाजपा संगठन ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश की है। साथ ही 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से हिंदुत्व एजेंडे़ के जरिए जातीय गणित को भी साधा गया है। इस संक्षिप्त विस्तार का सहारा लेकर भाजपा ने सपा के पीडीए फार्मूला की काट तैयार की है जिसके जरिए वह विपक्ष के लिए मजबूत घेराबंदी की जमीन भी तैयार करेगी।

नए सदस्यों को शामिल करते हुए पूरे मंत्रिमंडल को देखें तो पाएंगे कि भाजपा 2027 के संग्राम में जातियों की एकजुटता के सहारे हिंदुत्व की एकता को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने का संकेत दृष्टिगोचर होता है। प्रथम प्रयास जातियों की गणित साधते हुए हिंदुत्व को मजबूती देने का ही नजर आ रहा है। बगैर किसी बड़े उलटफेर के जिस तरह मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है और जिन चेहरों को शामिल किया गया है वह दर्शाता है कि भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश में विधानसभा के आगामी चुनाव में भरोसे और एकजुटता के संदेश के साथ उतरने का निर्णय किया है।

कुछ मंत्रियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलती रही हैं लेकिन पूर्व से मंत्रिमंडल में मौजूद किसी मंत्री को अगर छेड़ा नहीं गया है तो उसकी बड़ी वजह यही है कि भाजपा ने ऐसा करके यह संदेश देने का प्रयास किया है कि मंत्रिमंडल में कुछ गड़बड़ नहीं है और विपक्ष के सभी आरोप निराधार हैं।

भाजपा ने विस्तार के माध्यम से यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि नए चेहरों के जरिए जहां पीडीए की काट तैयार की गई है, वहीं मनोज पाण्डेय को शामिल कर ब्राह्मणों की नाराजगी भी दूर करने की कोशिश की गई है। साथ ही अगड़ों के सम्मान के ध्यान का संदेश भी दिया गया है।

कैलाश राजपूत भूपेंद्र चौधरी और हंसराज विश्वकर्मा को शामिल करके एवं अजीत सिंह पाल तथा सोमेन्द्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री के रूप में पदोन्नति देकर भाजपा ने पिछड़ों के सम्मानजनक प्रतिनिधित्व और उनके सरोकारों के प्रति सम्मान का संदेश पहुंचाया है।

साथ ही कृष्णा पासवान और सुरेन्द्र दिलेर को मंत्री बनाकर भाजपा ने दलित वर्ग की भी हिस्सेदारी का समुचित ध्यान रखा है। इस सबसे अधिक यह विस्तार भाजपा की ‘बंटोगे तो कटोगे’ की नीति को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है। इस विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने से ज्यादा हिंदुओं को एकजुट करने की कोशिश दिख रही है।

चुनावी लिहाज से हुए विस्तार में योगी कैबिनेट में पिछड़े समाज को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया गया है। विस्तार में पिछड़ी जाति के तीन सदस्यों को शामिल करने के पश्चात इनकी संख्या अब 25 और दलित समाज के मंत्रियों की संख्या 10 हो गई है।

60 सदस्यीय कैबिनेट में वर्तमान में सामान्य वर्ग के 21, अल्पसंख्यक वर्ग के 2 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक मंत्री सम्मिलित हैं।
दूसरे विस्तार के बाद मंत्रिपरिषद का कोटा पूर्ण हो गया। 403 सदस्यीय विधानसभा में 15 फीसदी के नियम के तहत सीएम के अलावा 60 मंत्री हो सकते हैं। विदित हो कि मंत्रिपरिषद में छह सीटें लंबे समय से रिक्त थीं।

बता दें कि मार्च 2024 में यूपी कैबिनेट का पहला विस्तार हुआ था। मंत्रिमंडल में सीएम व डिप्टी सीएम के अलावा 20 कैबिनेट मंत्री हैं। 16 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 21 राज्यमंत्री हैं।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले लोकसभा चुनाव से ही पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय का दांव खेल रहे हैं। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि ताजा विस्तार में पिछड़े और दलित समुदाय के 4 सदस्यों को शामिल करना अखिलेश के पीडीए की धार को कुंद करने की रणनीति है। टीम योगी में आधे से ज्यादा मंत्रियों का इन्हीं दोनों वर्गों से होना भी यही दर्शाता है कि भाजपा पीडीए को गंभीरता से ले रही है और किसी चूक के पक्ष में नहीं है।

वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि जब पिछले 9 वर्षों में भाजपा सरकार प्रदेश की जनता के लिए कुछ नहीं कर सकी, तो आखिरी के 9 महीनों में ये मंत्री क्या कर लेंगे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार ने भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। भाजपा सरकार में पीडीए के साथ बहुत अन्याय किया जा रहा है।

नए मंत्रियों को शपथ दिलाने के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए मंत्री पद की शपथ लेने वाले सभी मंत्रियों को बधाई संदेश दिया।

सीएम ने लिखा है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि राष्ट्र प्रथम के भाव से सभी मंत्री जनसेवा और सुशासन के संकल्पों के साथ उत्तर प्रदेश के विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेंगे। सीएम ने सभी नए मंत्रियों के उज्जवल भविष्य की कामना भी की।

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