नई दिल्ली : शिक्षा निदेशालय ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सभी निजी, गैर-सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि स्कूलों को फीस प्रत्येक महीने ही लेनी होगी। निदेशालय ने नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।
दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के प्रावधानों का हवाला देते हुए निदेशालय ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है। कठोर कार्रवाई के तहत मान्यता रद्द करना या स्कूल प्रबंधन पर कब्जा करना भी सम्मिलित है। शिक्षा निदेशालय ने यह कदम शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।
निदेशालय ने 30 अप्रैल के अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उसे अभिभावकों द्वारा कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों में बताया गया था कि कुछ स्कूलों द्वारा उन्हें दो महीने, तिमाही या अन्य अग्रिम आधार पर फीस देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे परिवारों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा था।
इस पर शिक्षा निदेशालय ने अपने निर्देश में दोहराया कि स्कूल एक किस्त में एक कैलेंडर माह से अधिक की फीस का भुगतान अनिवार्य नहीं कर सकते। यह कदम पहले के निर्देशों और दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप है। बता दें कि उच्च न्यायालय ने फीस संग्रह को अभिभावकों के लिए सुविधाजनक और उचित बनाने पर जोर दिया था। हालांकि, अभिभावक अपनी सुविधा के अनुरूप एक माह से अधिक की फीस एक साथ जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन पर कोई दबाव या प्रलोभन की स्थिति नहीं होनी चाहिए।
शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में कहा है कि कोई भी स्कूल प्रवेश, निरंतर नामांकन या किसी भी छात्र सेवा के लिए अग्रिम फीस भुगतान को शर्त नहीं बनाएगा। सभी स्कूलों को निदेशालय के इस आदेश को अपनी सूचना पट्टियों पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। उन्हें सात कार्य दिवसों के भीतर अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर भी इसे अपलोड करना होगा। निदेशालय का आशय यह सुनिश्चित करना है कि सभी अभिभावकों और हितधारकों को इसकी जानकारी प्राप्त हो सके।
दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के प्रावधानों का हवाला देते हुए निदेशालय ने यह फैसला लिया है। नियमों का पालन न करने पर कठोर कदम उठाए जाने की चेतावनी भी दी गई है। शिक्षा निदेशालय का यह कदम शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए है। इसका उद्देश्य अभिभावकों, विशेषकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के हितों की रक्षा करना है।
