नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के भाटी इलाके में अब कंक्रीट के बीच एक घना मियावाकी जंगल आकार लेने वाला है। दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने हवा को शुद्ध करने और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष परियोजना तैयार की है। इसमें जापानी तकनीक मियावाकी का इस्तेमाल कर हजारों पौधे उगाए जाएंगे, जोकि बहुत ही कम समय में एक घने जंगल का रूप ले लेंगे।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक तरीके से पेड़ तो लगाए जाएंगे ही, साथ ही एक वैज्ञानिक पद्धति का सहारा भी लिया जाएगा। वन विभाग के साउथ फॉरेस्ट डिवीजन ने निर्णय लिया है कि भाटी इलाके में 60,000 पौधे लगाए जाएंगे।
इसमें 40,000 छोटे पेड़ यानि सपलिंग्स और 20,000 विभिन्न तरह की झाड़ियां रोपी जाएंगी। मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में 10 गुना ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना ज्यादा घने होते हैं। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को मिलेगा, क्योंकि यह घना जंगल धूल को सोखने और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में किसी एयर प्यूरीफायर की तरह काम करेगा।
पौधे लगाने के पश्चात उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना आम बात है, लेकिन इस परियोजना में ऐसी लापरवाही की गुंजाइश नहीं होने पाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो भी संस्था इस काम की जिम्मेदारी लेगी, उसे पूरे वर्ष तक इन पौधों की देखभाल और रखरखाव भी करना पड़ेगा।
इस बड़ी परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इस काम की इच्छुक संस्थाओं और जानकारों को आगामी 20 मई को बैठक के लिए बुलाया है, ताकि काम की बारीकियों को समझा कर उसे पूरा किया जा सके।
प्रदूषण की समस्या झेल रही दिल्ली के लिए यह छोटा जंगल एक वरदान साबित हो सकता है। जब ये 60 हजार पौधे एक साथ लहलहाएंगे, तो समूचा इलाका जैव विविधता का केंद्र तो बनेगा ही, साथ ही स्थानीय पक्षियों व छोटे जीवों को भी नया घर मिल जाएगा। सरकार की ये कोशिश दिल्ली वालों को शुद्ध हवा और बेहतर भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विदित हो कि दक्षिणी दिल्ली का भाटी माइंस इलाका पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। यहां हरियाली बढ़ने से न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि गिरते भूजल स्तर को सुधारने में भी सहायता मिल सकेगी। यह परियोजना साल 2025-26 के लिए तय की गई है और तुगलकाबाद स्थित वन विभाग का कार्यालय इस योजना की रूप – रेखा तैयार कर रहा है।
